Seats in Bihar:
पटना, एजेंसियां। Bihar Election: बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं। एनडीए और महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों की हिस्सेदारी पर चर्चा चल रही है। इन चर्चाओं की अनेक सतहे हैं। ऊपरी परत पर सब कुछ सामान्य दिखता है। पर जैसे-जैसे परत हटाते जाएंगे,उसके ताप महसूस होने शुरू हो जाते हैं। ऐसा दोनों गठबंधनों में है। एनडीए और महागठबंधन के घटक दलों में सीटों की दावेदारी पर रस्साकशी है। अक्तूबर के अंत और नवंबर महीने में होने वाले चुनाव के परिणाम चाहे जैसा भी हो, इतना तय माना जा रहा कि सीटों के बंटवारे में 2020 में जो फार्मूला अपनाया गया था, कमोबेश वही फार्मूला इस बार भी अपनाया जायेगा।
एनडीए में इस बार दो नयी पार्टियों की इंट्रीः
एनडीए में इस बार दो नयी पार्टियों की इंट्री हुई है। पहली चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) और दूसरी उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो। ये दोनों पार्टियां 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए से अलग होकर चुनाव मैदान में गयी थीं। वहीं पिछली दफा एनडीए में आखिरी वक्त में आयी मुकेश सहनी की वीआइपी इस बार महागठबंधन के साथ है। महागठबंधन में भी सीटों को लेकर जोर आजमाइश है। कांग्रेस और वामदलों ने सीटों को लेकर अघोषित दवाब बना रखा है। बावजूद इसके एनडीए और महागठबंधन दोनों में पूर्व के अनुपात में ही सीटों का बंटना तय माना जा रहा है।
चिराग पासवान की हिस्सेदारी पर सबकी नजरः
एनडीए में जदयू और भाजपा कमोबेश बराबर की भूमिका में होगी और कुछ सीटों से जदयू इस बार भी बड़े भाई की भूमिका में होगा। वहीं महागठबंधन में राजद को सबसे अधिक सीटें मिलेंगी और दूसरे नंबर पर कांग्रेस होगी। एनडीए के भीतर जदयू और भाजपा के इतर चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) की महत्वाकांक्षाएं काफी बढ़ी हुई हैं। ज्यादा सीटों की कामना केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हम और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो को भी है। चिराग पासवान की पार्टी ने इसके लिए पूर्व के चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि वह पहली बार जदयू के साथ मिल कर चुनाव मैदान में जाने वाले हैं। पार्टी ने इशारों ही इशारों में सीटों की संख्या पर अपनी दावेदारी भी जता दी है।
छह प्रतिशत से 10 प्रतिशत वोट पर दावाः
2020 में भाजपा ने लोजपा को 27 सीटों का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अधिक सीटों पर अड़ी लोजपा ने अंतत: एनडीए से बाहर होने का फैसला लिया था। उस चुनाव में वह अकेले ही गयी थी। इस बार भी लोजपा ने सीटों की मांग पर अपना दबाव बनाया हुआ है। वहीं, हम कम से कम सात सीटें जीतने और छह प्रतिशत वोट पाने की रणनीति तय कर रही है, ताकि उसे राज्य पार्टी का दर्जा मिल जाये। उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो की चाहत भी कम नहीं है। बावजूद इसके सीटों के बंटवारे का जो फार्मूला होगा, पिछली दफे की तरह ही होगा। फर्क सि़र्फ यह होगा कि एनडीए में इस बार चिराग पासवान हैं और वीआइपी की जगह उपेंद्र कुशवाहा। एनडीए हो या महागठबंधन, दोनों शिविरों के महारथियों को भरोसा है कि सीट बंटवारा सही-सलामत तरीके से हो जायेगा।
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