बिहार चुनाव में नया समीकरण! BSP की एंट्री से बदलेगा दलित राजनीति का रुख? [New equation in Bihar elections! Will BSP’s entry change the direction of Dalit politics?]

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Bihar elections:

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में इन दिनों बड़ी हलचल है, जिसकी वजह है बहुजन समाज पार्टी (BSP) की जोरदार एंट्री। BSP के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद ने पटना में आयोजित छत्रपति शाहूजी महाराज की जयंती पर बड़ी राजनीतिक घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी और किसी दल से गठबंधन नहीं करेगी। यह बयान विपक्ष, खासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लिए एक सियासी झटका माना जा रहा है।

Bihar elections:”साइलेंट समर्थन”

अब तक बिहार की राजनीति में तेजस्वी यादव को दलितों का “साइलेंट समर्थन” मिलता रहा है, जो उनके MY (यादव-मुस्लिम) समीकरण को मजबूती देता था। लेकिन दलित वोट बैंक में कभी भी एकमुश्त RJD का दबदबा नहीं रहा। इसमें पासवान, मुसहर और धोबी जैसी जातियाँ शामिल हैं, जिन पर चिराग पासवान और जीतनराम मांझी जैसे नेता भी प्रभाव रखते हैं। बिहार में दलितों की आबादी लगभग 16% है, जो किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। BSP के इस ऐलान से दलित मतों का ध्रुवीकरण संभव है, जो RJD की जीत की संभावनाओं को नुकसान पहुँचा सकता है।

Bihar elections:आकाश आनंद ने कहा

आकाश आनंद ने कहा, “अब बहुजन समाज किसी और की बैसाखी नहीं, खुद नेतृत्व करेगा।” यह सीधा संदेश उन दलों के लिए है जो दशकों से दलित वोट बैंक का इस्तेमाल करते रहे हैं। यदि BSP इस वोट बैंक को अपने पक्ष में कर पाने में सफल रहती है, तो तेजस्वी यादव का मुख्यमंत्री बनने का सपना वाकई अधूरा रह सकता है।

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