Land for jobs case: लालू परिवार मुश्किल में, लैंड फॉर जॉब केस में 41 पर चार्जशीट कोर्ट ने कहा- लालू फैमिली ने आपराधिक गिरोह की तरह काम किया

Anjali Kumari
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Land for jobs case

पटना, एजेंसियां। लैंड फॉर जॉब केस में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कोर्ट ने लालू परिवार पर आरोप तय किए हैं। 41 लोगों पर आरोप तय हुए हैं। इन लोगों पर अब मुकदमा चलेगा। कोर्ट ने 52 लोगों को बरी किया है।

CBI ने दर्ज किया है मामला

सुनवाई को लेकर आज शुक्रवार 9 जनवरी को लालू यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती और बेटे तेजप्रताप-तेजस्वी दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज किया गया है।

व्यापक साजिश रची गईः कोर्ट

राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने कहा कि लालू यादव और उनका परिवार एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहे थे और उनकी ओर से एक व्यापक साजिश रची गई थी।

जज ने आदेश सुनाते हुए कहा, ‘अदालत संदेह के आधार पर यह पाती है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने परिवार (बेटियों, पत्नी और बेटों) के लिए अचल संपत्तियां हासिल करने के लिए सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की एक व्यापक साजिश रची थी।

52 आरोपी बरी

इस मामले में कुल 41 आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा13(2) और 13(1)(d) के तहत आरोप तय किए जाएंगे। कोर्ट ने 52 आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया है। मामल की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।

अब आगे क्या होगा

कोर्ट ने सबूत के आधार पर ये स्वीकार कर लिया है कि लालू यादव के ख़िलाफ लगाए गए आरोप सही हैं। इसके आधार पर अब उनके ख़िलाफ इस केस का ट्रायल चलेगा। ट्रायल में बहस होगी इसके बाद इस पर अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

लालू यादव के पास क्या हैं विकल्प

राजद सुप्रीमो लालू यादव लोअर कोर्ट के फैसले के खिलाफ हायर कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

CBI ने दायर की है चार्जशीट

पिछली सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत में एक सत्यापन रिपोर्ट पेश की, जिसमें बताया गया कि चार्जशीट में नामजद 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो चुकी है।

जांच एजेंसी ने लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप, बेटी और सांसद मीसा भारती, बेटी हेमा यादव समेत अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है।

2004 से 2009 के बीच रची गई साजिश

CBI का कहना है कि ‘यह पूरी साजिश 2004 से 2009 के बीच रची गई जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे। 2004 से 2009 के बीच मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर स्थित रेलवे के अलग अलग जोनों में बिहार के लोगों को “ग्रुप-डी” पदों पर बहाल किया गया।’
आरोप है कि इसके बदले में, इन व्यक्तियों या उनके परिवारों ने अपनी जमीन तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों और एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी को दी, जिसे बाद में उनके परिवार के सदस्यों ने अपने कब्जे में ले लिया।
जांच एजेंसी ने कहा कि इस दौरान लगभग सभी मामलों में नौकरी देने से पहले ही जमीनें ट्रांसफर की गईं और अधिकांश में गिफ्ट डीड तैयार कर ली गई थी।’
CBI ने आरोप पत्र में यह भी दावा किया है कि ‘जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब उनके करीबी भोला यादव ने गांव में जाकर कहा था कि अपने परिजनों को नौकरी दिलाने के एवज में अपनी-अपनी जमीन लालू परिवार के नाम कर दीजिए। लालू परिवार के नाम जमीन लिखने वाले सभी आरोपियों ने दावा किया है कि उन्हें लालू परिवार से नकद में भुगतान किया गया था।

लालू की बेटियों पर भी आरोप

सीबीआई ने इस मामले में सिर्फ लालू और उनके बेटों को ही नहीं, बल्कि उनकी बेटियों को भी आरोपी बनाया है। खासकर सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ भी चार्जशीट में आरोप दर्ज हैं कि उन्हें भी नाम मात्र की कीमत पर ज़मीन ट्रांसफर की गई थी।

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