Ayodhya in Bihar:
सीतामढ़ी, एजेंसियां। बिहार में माता सीता की जन्मस्थली माने जाने वाले पुनौराधाम को अब अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक निर्णय को लागू करने के लिए राज्य सरकार ने बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम, 1950 में संशोधन कर तत्काल प्रभाव से अध्यादेश जारी कर दिया है। इस संशोधन के तहत अब पुनौराधाम मंदिर की सारी भूमि और परिसंपत्तियों का प्रशासन राज्य सरकार के अधीन होगा। इसके साथ ही मंदिर का संचालन कर रही पूर्व न्यास समिति को भंग कर दिया गया है। हालांकि मंदिर के वर्तमान महंत को सरकार द्वारा गठित नई समिति में स्थान दिया जाएगा। यह समिति धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विकास के लिए कार्य करेगी, जिसमें प्रतिष्ठित एवं अनुभवी व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा।
Ayodhya in Bihar: राष्ट्रीय महत्व का धर्मिक और पर्यटन केंद्र बनेगाः
राज्य सरकार की योजना है कि पुनौराधाम को राष्ट्रीय महत्व का धार्मिक और पर्यटन केंद्र बनाया जाए। इसके अंतर्गत मंदिर परिसर का पुनर्विकास, परिसंपत्तियों का संरक्षण, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार और रामायण सर्किट के तहत आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा। गजट अधिसूचना के अनुसार धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा 32 में संशोधन करते हुए यह विशेष प्रावधान जोड़ा गया है, जिससे सरकार अब इस ऐतिहासिक स्थल के समग्र विकास की योजना बना सकेगी।
Ayodhya in Bihar: नई समिति के नियंत्रण में रहेंगे सारे कर्मचारीः
मंदिर से जुड़े सभी कर्मचारी अब नई समिति के नियंत्रण में रहेंगे और उनके अनुशासन तथा सेवाओं का निर्धारण समिति करेगी। सरकार की यह पहल धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक पर्यटन को जोड़कर पुनौराधाम को एक भव्य और समग्र धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
Ayodhya in Bihar: पुनौराधाम और अयोध्या के बीच गहरा धार्मिक संबंधः
ऐतिहासिक और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माता सीता का जन्म पुनौराकीला में हुआ था, जिसे अब पुनौराधाम कहा जाता है। रामायण कालीन इस स्थल का उल्लेख कई प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है, जिससे इसकी धार्मिक प्रामाणिकता को बल मिलता है।
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