Aadhaar card:
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में लगभग हर व्यक्ति के पास आज आधार कार्ड है, लेकिन इसके बावजूद यह नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता। आधार कार्ड भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी किया गया 12 अंकों का बायोमेट्रिक पहचान पत्र है, जिसमें व्यक्ति के फिंगरप्रिंट, आंखों की पुतलियों की स्कैनिंग, फोटो, नाम, जन्मतिथि और पता होता है। हालांकि यह भारत में पहचान और पते का प्रमाण देता है, लेकिन UIDAI स्पष्ट कर चुका है कि यह नागरिकता का सबूत नहीं है।
Aadhaar card:नागरिकता एक संवैधानिक अधिकार है
नागरिकता एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे साबित करने के लिए कानूनी दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती है जैसे जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, या भारत में माता-पिता की नागरिकता से जुड़ी जानकारी। आधार कार्ड बनवाने के लिए केवल यह दिखाना होता है कि कोई व्यक्ति भारत में कम से कम 182 दिन रह चुका है – यही कारण है कि कोई विदेशी नागरिक भी इसका हकदार हो सकता है।
फिर भी, आधार भारत में कई सरकारी और निजी सेवाओं में अनिवार्य हो चुका है। इसका उपयोग एलपीजी सब्सिडी, राशन कार्ड, पेंशन, जनधन योजना, मनरेगा भुगतान, आदि में होता है। इसके अलावा बैंक खाता खोलने, मोबाइल सिम लेने, पैन कार्ड लिंक करने और टैक्स भरने जैसे कार्यों में भी यह अहम भूमिका निभाता है। डिजिटल इंडिया की योजनाओं जैसे डिजिलॉकर, ई-हॉस्पिटल, ई-वॉलेट आदि में भी आधार का इस्तेमाल होता है।
Aadhaar card:चुनाव आयोग द्वारा
हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के पुनरीक्षण में भी आधार को प्रमाण के रूप में स्वीकार करने पर बहस हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर निर्देश दिया कि वोटर कार्ड, राशन कार्ड और आधार – तीनों को प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।इस तरह, आधार कार्ड भले ही नागरिकता का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह भारत का सबसे प्रभावशाली और व्यापक पहचान दस्तावेज़ बन चुका है।
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