Aadhaar card:
नई दिल्ली, एजेंसियां। आधार कार्ड आज भारतीय नागरिकों के लिए सबसे अहम पहचान पत्र बन चुका है, जो लगभग हर सरकारी और निजी सेवा में अनिवार्य हो चुका है। बैंक खाता खुलवाने से लेकर मोबाइल सिम लेने तक, सरकारी सब्सिडी से लेकर पासपोर्ट बनाने तक, आधार कार्ड का उपयोग हर जगह हो रहा है। लेकिन इस सब के बीच यह सवाल फिर से उभर कर सामने आया है कि आधार कार्ड की कानूनी सीमा क्या है? क्या इसे नागरिकता का प्रमाण माना जा सकता है, और क्या इसे निवास के पुख्ता सबूत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है?
आधार कार्ड में क्या होता है?
आधार कार्ड एक 12 अंकों का यूनिक पहचान नंबर है, जो यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) द्वारा भारतीय निवासियों को दिया जाता है। इसमें व्यक्ति की पहचान की पूरी जानकारी शामिल होती है। आधार कार्ड को एक पहचान और निवास प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला:
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बिहार के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में यह स्पष्ट किया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है। कोर्ट ने चुनाव आयोग के उस रुख को सही ठहराया, जिसमें उसने आधार कार्ड को निवास प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि आधार और राशन कार्ड को निवास का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता है, खासकर SIR प्रक्रिया में।
वहीं बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी नागरिकता के सत्यापन से जुड़ी एक मामले में यह स्पष्ट किया कि आधार, पैन और वोटर आईडी को नागरिकता प्रमाण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि नागरिकता का सत्यापन करने के लिए अधिक प्रमाण-आधारित दस्तावेज की आवश्यकता होती है।
आधार की सीमा क्या है?
आधार कार्ड को पहचान और निवास प्रमाण के रूप में व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन नागरिकता प्रमाण के रूप में इसकी सीमाएं हैं। सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट दोनों ने इस बात पर जोर दिया है कि आधार कार्ड को सार्वजनिक न्यायिक या संवैधानिक प्रक्रिया में निर्णायक आधार नहीं बनाया जा सकता। विशेषकर बिहार के SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार चुनाव आयोग का है, और इसमें आधार का उपयोग निर्णायक नहीं हो सकता।
कानूनी सटीकता की जरूरत
इस फैसले से यह साफ है कि नागरिकता और मताधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों में दस्तावेज़ों की सटीकता और भरोसेमंदता की रक्षा की जरूरत है। यह फ़ैसला इस बात को सुनिश्चित करता है कि संवेदनशील मुद्दों पर केवल आधार कार्ड का उपयोग नहीं किया जाए, बल्कि सही दस्तावेज़ों का प्रमाण होना चाहिए।
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