Supreme Court big statement:
मथुरा, एजेंसियां। वृंदावन के ऐतिहासिक श्री बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन को लेकर जारी लंबे समय से विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम टिप्पणी की। मंदिर के अधिकार और नियंत्रण को लेकर गोस्वामी परिवार और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच चल रहे मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने गोस्वामी पक्ष के अधिवक्ताओं को कड़ी फटकार लगाई।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बार-बार एक ही मुद्दे को उठाना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और भविष्य में ऐसा होने पर अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा, “आप इस तरह के खेल और चालें बंद कीजिए।” यह तब कहा गया जब गोस्वामी पक्ष ने उस मुद्दे को फिर से उठाया जिसे अदालत पहले ही खारिज कर चुकी थी।
उत्तर प्रदेश सरकार
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं नवीन पहवा और के. नटराजन ने भी कोर्ट को बताया कि गोस्वामी पक्ष पहले ही इसी मामले को दूसरी पीठ में स्थानांतरित करने की कोशिश कर चुका है, जबकि वह पहले से ही न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ में सूचीबद्ध था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कपिल सिब्बल के कनिष्ठ सहयोगी अधिवक्ता शिवांश पांण्डया के विरुद्ध अवमानना की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश भी दिया, हालांकि न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने फिलहाल कार्यवाही को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया। मामला बांके बिहारी मंदिर के सरकारी अध्यादेश और हाल ही में गठित प्रबंधन समिति को लेकर है, जिसके खिलाफ गोस्वामी पक्ष ने 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह न्यायिक प्रक्रिया में हेरफेर नहीं सहेगा और दोहराव या अनुचित प्रयासों को गंभीरता से लेगा।
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