Chemistry professor Mamta Pathak:
भोपाल, एजेंसियां। मध्य प्रदेश के छतरपुर की केमिस्ट्री प्रोफेसर ममता पाठक को अपने पति डॉ. नीरज पाठक की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह फैसला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दिया है। ममता पाठक का यह केस इंटरनेट पर काफी चर्चा में रहा क्योंकि उन्होंने बिना वकील के खुद ही अपना केस लड़ने की हिम्मत दिखाई थी।
क्या है मामला ?
मामला 2022 का है, जब सरकारी डॉक्टर नीरज पाठक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने मौत की वजह करंट लगने को माना, लेकिन फॉरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कई सवाल उठे। बाद में जांच में पत्नी ममता पाठक पर हत्या का आरोप लगाया गया।जिला अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर ममता पाठक को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। ममता को कुछ समय के लिए अंतरिम जमानत भी मिली थी ताकि वह अपने बेटे का ख्याल रख सकें। इसके बाद उन्होंने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी और खुद ही अपनी दलीलें पेश कीं।
कोर्ट में ममता पाठक को दिया था तर्क
कोर्ट में ममता पाठक ने तर्क दिया कि थर्मल और इलेक्ट्रिक बर्न समान दिख सकते हैं, और दोनों में फर्क केवल केमिकल एनालिसिस से ही पता चल सकता है। इस वैज्ञानिक तर्क ने कोर्ट के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी ध्यान खींचा। जज द्वारा पूछे गए सवाल पर जब ममता ने कहा कि वह केमिस्ट्री प्रोफेसर हैं, तो उनकी तर्कशक्ति और धैर्य की खूब सराहना हुई।
हालांकि, कोर्ट ने ममता के तर्कों को स्वीकार नहीं किया और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इस फैसले के साथ ही ममता पाठक को आजीवन जेल की सजा सुनाई गई। यह केस घरेलू विवाद और न्यायिक प्रक्रिया के कई पहलुओं पर भी सवाल उठाता है।
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