9 years of UPI payment:
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में डिजिटल पेमेंट क्रांति की शुरुआत 2016 में यूपीआई (Unified Payments Interface) के लॉन्च से हुई, जिसने देश के करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी को आसान बना दिया है। मोबाइल से कुछ सेकंड में पेमेंट करने वाला यह प्लेटफॉर्म आज भारत के हर कोने में लोकप्रिय हो चुका है। आइए जानते हैं यूपीआई के सफर में अब तक कौन-कौन से महत्वपूर्ण बदलाव और अपडेट हुए हैं:
2016: यूपीआई का आगाज
NPCI ने 2016 में यूपीआई को लॉन्च किया, जिसका मकसद था सभी बैंकों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ना, ताकि IFSC या अकाउंट नंबर के बिना भी पेमेंट किया जा सके। केवल मोबाइल नंबर या यूपीआई आईडी से पैसे भेजना और लेना संभव हुआ।
2017-18: BHIM ऐप और QR कोड का उपयोग
BHIM ऐप के लॉन्च से आम लोगों ने सीधे यूपीआई का इस्तेमाल शुरू किया। दुकानों पर QR कोड लगने लगे, जिससे मोबाइल से आसानी से पेमेंट संभव हुआ।
2019: ऑटो पेमेंट फीचर आया
Netflix, OTT, EMI, और इंश्योरेंस जैसी सर्विसेज के लिए UPI AutoPay शुरू हुआ। यूजर्स एक बार अनुमति देकर रीक्यरिंग पेमेंट्स बिना OTP के कर सकते हैं, जिससे डिजिटल सेवा लेना आसान हुआ।
2020: कोविड-19 के दौरान यूपीआई का जोरदार विस्तार
लॉकडाउन में कैशलेस पेमेंट की मांग बढ़ी और यूपीआई ट्रांजैक्शन 2 बिलियन के पार पहुंच गए। किराना, दवा, दूध जैसी जगहों पर भी यूपीआई सामान्य हो गया।
2021: फीचर फोन के लिए यूपीआई और अंतरराष्ट्रीय विस्तार
UPI 123PAY से बिना इंटरनेट वाले फोन से भी यूपीआई पेमेंट संभव हुआ। भारत ने भूटान, नेपाल, और सिंगापुर में यूपीआई लिंकिंग शुरू की, जिससे विदेशों में भी यूपीआई इस्तेमाल बढ़ा।
2022: क्रेडिट कार्ड से यूपीआई पेमेंट
RBI ने RuPay क्रेडिट कार्ड से यूपीआई पेमेंट की अनुमति दी, जिससे यूपीआई का दायरा बैंक अकाउंट से बढ़कर कार्ड तक पहुंच गया।
2023: AI आधारित सिक्योरिटी अपडेट
फ्रॉड डिटेक्शन के लिए AI तकनीक यूपीआई में जोड़ी गई, जिससे धोखाधड़ी पर बेहतर नियंत्रण और यूजर्स को सुरक्षा मिली।
2024: UPI Lite और Tap & Pay
छोटे पेमेंट के लिए UPI Lite पेश किया गया, जिसमें 500 रुपये तक बिना PIN के पेमेंट हो सकेगा। NFC आधारित Tap & Pay फीचर भी आया, जिससे QR कोड की जरूरत खत्म हुई।
2025: बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन आने वाला है
जल्द ही यूपीआई पेमेंट के लिए PIN की जगह फेस आईडी, फिंगरप्रिंट, या आईरिस स्कैन जैसे बायोमेट्रिक विकल्प आएंगे। NPCI इसका टेस्टिंग फेज चला रहा है और इसे कुछ महीने में चुनिंदा बैंकों व ऐप्स में शुरू किया जाएगा।
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