Lok Sabha:
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र का पहले सप्ताह में काफी हंगामे हुए। अब सोमवार से लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले पर बहस शुरू होने जा रही है, जिसमें तीखी बहस होने की संभावना है। सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों ही इन दो संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे हैं।
कौन रखेगा सरकार का पक्ष?
सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, और विदेश मंत्री एस जयशंकर इन मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दोनों सदनों में इन मुद्दों पर बयान दे सकते हैं। वहीं, विपक्ष की ओर से राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव जैसे प्रमुख नेता सरकार को कटघरे में खड़ा करने के लिए चर्चा में भाग लेंगे।
ऑपरेशन सिंदूर पर विपक्ष का हमला:
विपक्षी दलों की विशेष चिंता ऑपरेशन सिंदूर को लेकर है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की भूमिका पर सबकी नजरें रहेंगी, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद थरूर ने विभिन्न देशों, खासकर अमेरिका में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। विपक्ष यह सवाल उठाने की योजना बना सकता है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप का दावा सही था कि उन्होंने व्यापार रोकने की धमकी देकर भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया था। हालांकि, भारत सरकार ने पहले ही इस दावे को खारिज कर दिया था, लेकिन अब यह मुद्दा लोकसभा में तूल पकड़ सकता है।
विपक्ष का आरोप:
राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों ने लगातार आरोप लगाए हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भारत को किसी अन्य देश का सहयोग नहीं मिला। इसके साथ ही, विपक्ष ने पहलगाम आतंकी हमले में सुरक्षा चूक का मुद्दा भी उठाने की योजना बनाई है।
लोकसभा में बहस की समयसीमा:
लोकसभा में 16 घंटे की बहस पर सहमति बनी है, जो आमतौर पर निर्धारित समय से ज्यादा होगी। लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत के सशक्त और निर्णायक ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा होगी। यह सत्र खासतौर पर दोनों पक्षों के लिए अपनी-अपनी रणनीति और नीति को स्पष्ट करने का अवसर होगा, और देखा जाएगा कि बहस के दौरान कौन अधिक प्रभावी होता है।
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