Hanuman Temple:
वाराणसी, एजेंसियां। वाराणसी का संकट मोचन मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जहां भक्तों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता। यहां न तो वीआईपी के लिए अलग लाइन है, न कोई विशेष सुविधा। चाहे आम श्रद्धालु हो या कोई बड़ी हस्ती, सभी को एक समान नियमों के तहत दर्शन करने होते हैं। यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है और आज भी पूरी श्रद्धा के साथ बरकरार है।
मंदिर में नहीं चलता रसूख
देश में अक्सर यह बहस होती है कि क्या भगवान के दरबार में भी रसूख हावी हो गया है? क्या वीआईपी दर्शन के नाम पर आम लोगों को पीछे कर दिया जाता है? लेकिन संकट मोचन मंदिर इस सोच को पूरी तरह नकारता है। यहां देश के बड़े नेता, अधिकारी, और सेलिब्रिटीज भी उसी लाइन में खड़े होकर दर्शन करते हैं, जैसे आम भक्त।
दर्शन की व्यवस्था
मंदिर में सुबह 4:30 बजे कपाट खुलते हैं और दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक मंदिर बंद रहता है। मंगलवार और शनिवार को रात्रि 12 बजे तक और अन्य दिनों में रात 10:40 तक मंदिर खुला रहता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रसाद, लड्डू व माला बाहर की दुकानों से खरीदकर भगवान को अर्पित करते हैं।
महंत का संदेश
मंदिर के महंत डॉ. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने बताया कि यह व्यवस्था सभी भक्तों के सहयोग से बनी हुई है। “हमारा प्रयास है कि किसी को असुविधा न हो और मंदिर की परंपरा यथावत बनी रहे। यह मंदिर श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है,” उन्होंने कहा। इस अनोखी व्यवस्था के कारण संकट मोचन मंदिर न सिर्फ श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि समरसता का भी उदाहरण है।
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