Supreme Court:
नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग से जुड़ी याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर नोटिस जारी किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने स्वामी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति देते हुए केंद्र से चार हफ्ते में जवाब देने को कहा है। स्वामी ने अपनी याचिका में 19 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का हवाला दिया है।
दोबारा कोर्ट पहुंचे हैं स्वामीः
उस समय केंद्र ने स्वामी की ही याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया था कि रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने के मुद्दे पर विचार किया जा रहा है। कोर्ट ने केंद्र से इस पर निर्णय लेने को कहा था और स्वामी को यह स्वतंत्रता दी थी कि यदि वे संतुष्ट न हों तो दोबारा कोर्ट आ सकते हैं।
स्वामी की नई याचिका में क्या हैः
स्वामी की नई याचिका में कहा गया है, 19 जनवरी 2023 के आदेश के बाद उन्होंने 27 जनवरी 2023 को केंद्र को सभी दस्तावेजों के साथ एक प्रतिनिधित्व सौंपा था। इसके बाद 13 मई 2025 को उन्होंने एक और नया प्रतिनिधित्व भेजा, लेकिन अब तक न तो उन्हें और न ही सुप्रीम कोर्ट को कोई जवाब मिला है।
याचिका में मांग की गई है कि संस्कृति मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट के 19 जनवरी 2023 के आदेश के अनुसार स्वामी के प्रतिनिधित्व पर जल्द से जल्द और समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए।
स्वामी बोले- रामसेतु आस्था का प्रतीक हैः
स्वामी की याचिका में कहा गया है कि रामसेतु एक पुरातात्विक स्थल होने के साथ-साथ करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र भी है। वैज्ञानिक और पुरातात्विक अध्ययन इस बात के प्रमाण हैं कि यह मानव निर्मित संरचना है, जिसे श्रद्धालु तीर्थस्थल मानते हैं।
स्वामी ने पहली याचिका 2007 में दायर की थीः
राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग कई सालों से उठ रही है। साल 2007 में सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। यह याचिका सेतु समुद्रम शिप चैनल परियोजना के खिलाफ थी।
इस परियोजना के तहत, सरकार 83 किलोमीटर लंबी एक नहर बनाने की योजना पर काम कर रही थी, जो मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरूमध्य को जोड़ती। इसके लिए समुद्र में बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग (समुद्र की गहराई बढ़ाने का काम) किया जाना था।
आरोप था कि इस परियोजना से राम सेतु को नुकसान पहुंच सकता है। स्वामी का कहना है कि इसी वजह से उन्होंने मांग की है कि राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दिया जाए, ताकि इसे बचाया जा सके।
क्या है रामसेतुः
भारत के रामेश्वरम और श्रीलंका के मन्नार द्वीप के बीच चूने की उथली चट्टानों की चेन है। इसे भारत में रामसेतु और दुनियाभर में एडम्स ब्रिज (आदम का पुल) के नाम से जाना जाता है।
इस पुल की लंबाई लगभग 30 मील (48 किमी) है। यह पुल मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरू मध्य को एक दूसरे से अलग करता है। इस इलाके में समुद्र बेहद उथला है। जिससे यहां बड़ी नावें और जहाज चलाने में खासी दिक्कत आती है।
कहा जाता है कि 15वीं शताब्दी तक इस ढांचे पर चलकर रामेश्वरम से मन्नार द्वीप तक जाया जा सकता था, लेकिन तूफानों ने यहां समुद्र को कुछ गहरा कर दिया जिसके बाद यह पुल समुद्र में डूब गया।
1993 में नासा ने इस रामसेतु की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की थीं, जिसमें इसे मानव निर्मित पुल बताया गया था।
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