Ramdas Soren:
रांची। झारखंड की घाटशिला विधानसभा सीट एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में है। पूर्व मंत्री और झामुमो विधायक रामदास सोरेन के निधन के बाद यह सीट रिक्त हुई है और अब यहां उपचुनाव अनिवार्य हो गया है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 151-ए के अनुसार, इस सीट पर 16 जनवरी 2026 से पहले मतदान कराया जाना जरूरी है। संकेत मिल रहे हैं कि यह उपचुनाव बिहार विधानसभा चुनाव के साथ कराया जा सकता है।
चुनाव आयोग ने शुरू की तैयारियां:
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम की घोषणा की गई है। 1 जुलाई 2025 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके लोग वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा सकते हैं। प्रारूप मतदाता सूची 2 सितंबर को प्रकाशित होगी और 17 सितंबर तक नामांकन, सुधार व आपत्ति का मौका मिलेगा। अंतिम सूची 29 सितंबर 2025 को प्रकाशित की जाएगी।
घाटशिला सीट का चुनावी इतिहास:
2009: झामुमो के रामदास सोरेन ने कांग्रेस को हराया
2014: भाजपा के लक्ष्मण टूडू की जीत
2019: रामदास सोरेन की वापसी, भाजपा को हराया
2024: रामदास सोरेन ने भाजपा के बाबूलाल सोरेन को 22,446 वोटों से हराया
सामाजिक और राजनीतिक समीकरण:
यह सीट आदिवासी आरक्षित है, जिसमें 48.29% ST, 5.32% SC, और शेष OBC व सामान्य वर्ग के मतदाता हैं। ग्रामीण आबादी लगभग 72% है। रामदास सोरेन के निधन से झामुमो को सहानुभूति लहर का लाभ मिल सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी उनके बेटे सोमेश सोरेन को टिकट दे सकती है। वहीं भाजपा के लिए प्रत्याशी चयन चुनौती बना हुआ है – बाबूलाल सोरेन को फिर उतारा जाए या नया चेहरा तलाशा जाए, इस पर मंथन जारी है।यह उपचुनाव झारखंड में आदिवासी राजनीति और गठबंधन समीकरणों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
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