Bangladesh elections: बांग्लादेश में चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी पर अमेरिका की नजर, जानें क्यों बढ़ी भारत की चिंता?

Juli Gupta
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Bangladesh elections:

ढाका, एजेंसियां। बांग्लादेश में फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनाव सिर्फ देश की सत्ता का भविष्य तय नहीं करेंगे, बल्कि भारत, अमेरिका और पूरे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति पर भी गहरा असर डाल सकते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता छोड़ने और देश से बाहर जाने के करीब डेढ़ साल बाद यह पहला बड़ा चुनाव होगा। अहम बात यह है कि शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिससे राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार

इस बदले हालात में इस्लामवादी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के अब तक के सबसे बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच अमेरिका ने जमात के साथ अपने संपर्क और संवाद को बढ़ा दिया है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राजनयिकों ने संकेत दिए हैं कि वे जमात-ए-इस्लामी के साथ काम करने को तैयार हैं। एक बंद कमरे की बैठक में अमेरिकी राजनयिक ने यहां तक कहा कि बांग्लादेश अब इस्लामिक दिशा में शिफ्ट हो चुका है और जमात इस चुनाव में बड़ा प्रदर्शन कर सकती है।

हालांकि, शरिया कानून लागू होने की आशंकाओं को अमेरिकी पक्ष ने खारिज करते हुए कहा कि ऐसा होने पर कड़े आर्थिक कदम उठाए जाएंगे। वहीं ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका किसी एक पार्टी का समर्थन नहीं करता और वह लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार के साथ काम करेगा।

जमात-ए-इस्लामी का इतिहास

जमात-ए-इस्लामी का इतिहास बेहद विवादित रहा है। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान उस पर पाकिस्तानी सेना का साथ देने और युद्ध अपराधों के गंभीर आरोप लगे थे। शेख हसीना के कार्यकाल में पार्टी पर प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे 2024 में हटाया गया। इसके बाद पार्टी ने खुद को दोबारा संगठित कर मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में पेश किया है।
जमात से अमेरिका के बढ़ते संपर्क को भारत के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। भारत में जमात-ए-इस्लामी पहले से ही प्रतिबंधित संगठन है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जमात सत्ता में आती है तो भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ सकता है और इसका असर भारत-अमेरिका रिश्तों पर भी पड़ सकता है।

12 फरवरी को होने वाले चुनाव में मुख्य मुकाबला BNP और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच होने की संभावना है, जिससे बांग्लादेश की राजनीति के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन भी नई दिशा ले सकता है।

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