Robots on wheels:
मास्को, एजेंसियां। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में यूक्रेनी सेना ने अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए रिमोट-नियंत्रित बख्तरबंद वाहनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इन वाहनों को ‘रोबोट ऑन व्हील्स’ कहा जाता है और ये कई तरह के काम करने में सक्षम हैं। यूक्रेनी सैनिक इन वाहनों के माध्यम से रसद पहुंचाने, बारूदी सुरंगें साफ करने और घायलों या मृतकों को निकालने जैसे खतरनाक मिशन कर सकते हैं।
सैनिक हानि और पलायन के कारण
यूक्रेन में पिछले साढ़े तीन साल के युद्ध में भारी सैनिक हानि और पलायन के कारण सैनिकों की कमी बनी हुई है। ऐसे में रोबोट वाहन उनकी जगह लेकर खतरनाक परिस्थितियों में मिशन को पूरा करने में मदद कर रहे हैं। हालांकि, ये वाहन पूरी तरह सैनिकों की जगह नहीं ले सकते। कुछ मिशन जैसे स्नाइपर तैनाती, दुश्मन के इलाके में रेकी और घात लगाने के लिए इंसानी हस्तक्षेप जरूरी है।
ये रोबोटिक वाहन मुख्य रूप से यूक्रेनी कंपनियों द्वारा बनाए जाते हैं और इनकी कीमत 1,000 डॉलर से 64,000 डॉलर तक होती है। हल्के वजन और घरेलू निर्माण के कारण इनका रखरखाव आसान और किफायती है। अग्रिम पंक्ति में तैनाती से सैनिकों की जान सुरक्षित रहती है।
रूस भी ऐसे वाहनों का इस्तेमाल करता है
रूसी सेना में उरान-9, नरेखता और सोरातनिक जैसे रोबोट वाहन हैं। उरान-9 में मशीन गन, एंटी-टैंक मिसाइल और ग्रेनेड लांचर लगे हैं, जबकि नरेखता और सोरातनिक टोही, हथियार ढोने और मल्टी-फंक्शनल मिशनों में काम आते हैं।
इस प्रकार, रोबोट वाहनों का इस्तेमाल युद्ध में सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाने और खतरनाक मिशनों को कारगर बनाने के लिए एक नई रणनीति के रूप में उभर रहा है। यूक्रेन इन वाहनों की मदद से न केवल सैनिकों की जान बचा रहा है, बल्कि युद्ध में तकनीकी बढ़त भी हासिल कर रहा है।
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