Tarique Rahman oath ceremony: तारिक रहमान की ताजपोशी से पहले गंगा जल संधि पर बदले तेवर

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Tarique Rahman oath ceremony:

ढाका, एजेंसियां। बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव में BNP की जीत के बाद अब Tarique Rahman प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। शपथ से ठीक पहले उनके विदेश मामलों के सलाहकार Humayun Kabir ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिससे दोनों देशों के संबंधों पर नई बहस छिड़ गई है।‘भारत में बढ़ती सांप्रदायिकता चिंता का विषय’हुमायूं कबीर ने कहा कि भारत में बढ़ रही सांप्रदायिक घटनाएं बांग्लादेश के लिए चिंता का विषय हैं। उनका कहना था कि बांग्लादेश के लोगों को लगता है कि भारत एक असहिष्णु समाज की ओर बढ़ रहा है और कट्टरपंथी बयानबाजी के सहारे चुनाव जीते जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को यह स्वीकार करना चाहिए कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina तथा उनकी पार्टी Awami League अब सत्ता में नहीं हैं।

1996 की गंगा जल संधि पर पुनर्विचार

सबसे अहम मुद्दा 1996 की गंगा जल संधि का है, जो दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है। यह संधि Sheikh Hasina के कार्यकाल में हुई थी और 30 वर्षों के लिए लागू है। कबीर ने स्पष्ट किया कि नई सरकार इस संधि के नवीनीकरण पर फैसला केवल बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर करेगी। उन्होंने कहा कि पहले अक्सर भारतीय राज्यों के हितों को प्राथमिकता दी जाती रही, लेकिन अब ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति के तहत कृषि, पर्यावरण और आर्थिक जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी।

क्या है गंगा जल संधि?

इस समझौते के तहत फरक्का बैराज से सूखे के मौसम में गंगा का पानी भारत और बांग्लादेश के बीच बांटा जाता है। बांग्लादेश को 35,000 क्यूसेक पानी मिलने का प्रावधान है। हालांकि, बांग्लादेश लंबे समय से शिकायत करता रहा है कि सूखे के दौरान उसे तय मात्रा से कम पानी मिलता है, जिससे दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में खारे पानी की समस्या और कृषि नुकसान बढ़ता है।

भारत के लिए चुनौतीपूर्ण दौर?

भारत की ओर से पश्चिम बंगाल समेत कई राज्य सूखे के समय अधिक पानी की मांग करते हैं। ऐसे में संधि का नवीनीकरण दोनों देशों के लिए जटिल बातचीत का कारण बन सकता है।भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी है और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की बात कही है। लेकिन नई परिस्थितियों में गंगा जल बंटवारा, सीमा सुरक्षा, अल्पसंख्यक संरक्षण और व्यापार जैसे मुद्दे वार्ता के केंद्र में रहेंगे।

रिश्तों की अग्निपरीक्षा

गंगा जल संधि सिर्फ पानी का समझौता नहीं, बल्कि भारत-बांग्लादेश के रणनीतिक और विश्वास आधारित संबंधों की कसौटी भी है। नई BNP सरकार के सख्त संकेतों के बीच आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच कठिन लेकिन अहम बातचीत की उम्मीद है।

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