Su-57 fighter jet India:
वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच F-35 लड़ाकू विमानों की ऐतिहासिक डील फाइनल होते ही रूस ने भारत के लिए एक बड़ा और रणनीतिक प्रस्ताव पेश किया है। रूस ने भारत को अपने अत्याधुनिक Su-57E स्टेल्थ फाइटर जेट का एक व्यापक पैकेज ऑफर किया है, जिसमें विमान की आपूर्ति से लेकर भारत में उसका उत्पादन, 100 प्रतिशत तकनीकी हस्तांतरण और भारतीय हथियारों के इंटीग्रेशन तक की सुविधा शामिल है। यह पेशकश ऐसे समय में सामने आई है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की भारत यात्रा नजदीक है और भारत भविष्य की एयर फ्लीट के लिए नए विकल्प तलाश रहा है।
रूसी अधिकारियों ने साफ किया:
दुबई एयर शो 2025 में रूसी अधिकारियों ने साफ किया कि Su-57E अब सीरियल प्रोडक्शन में है और इसे रूसी एयरोस्पेस फोर्सेज में शामिल किया जा रहा है। इसी संस्करण को रूस भारत को देने को तैयार है। रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के वरिष्ठ प्रतिनिधि ने कहा कि मॉस्को न केवल तैयार विमान देने के लिए तैयार है, बल्कि भारत में लाइसेंस्ड प्रोडक्शन, भारतीय कारखानों में स्थानीयकरण और पूर्ण तकनीकी हस्तांतरण भी देगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि रूस की ओर से यह तकनीक किसी प्रतिबंध या भू-राजनीतिक बाधा के बिना दी जाएगी, जबकि पश्चिमी देशों के साथ ऐसे सौदों में अक्सर सीमाएं होती हैं। रूस के अनुसार, Su-57 का उत्पादन भारत में होने से भारत को भविष्य में किसी भी पुर्जे, अपग्रेड या सप्लाई पर कभी रोक का डर नहीं रहेगा।
यह ऑफर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के महीनों में भारत को पश्चिमी रक्षा तकनीक में कई अड़चनों का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी GE इंजन का मामला हो या हाल में अपाचे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी में देरी—भारत को स्पष्ट संदेश मिल रहा है कि पश्चिमी पार्टनर्स संवेदनशील तकनीक आसानी से शेयर नहीं करते। इसी बीच फ्रांस के साथ लड़ाकू इंजन सौदे में भी प्रगति सीमित रही है। ऐसे माहौल में रूस का यह खुला और व्यापक ऑफर भारत को आकर्षित कर सकता है।
रूस Su-57E को अपनी पांचवीं पीढ़ी के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक बताता है। विमान में उच्च प्रतिशत कंपोजिट सामग्री, रडार-अवशोषक कोटिंग, स्टेल्थ डिजाइन, इंटरनल वेपन बे, लंबी सुपरसोनिक सहनशक्ति, AI-आधारित कॉकपिट, 240 किलोमीटर रेंज वाला AESA रडार, 360-डिग्री सिचुएशनल अवेयरनेस देने वाले सेंसर और दस से अधिक नई पीढ़ी के एयर-लॉन्च्ड हथियार शामिल हैं। रूस दावा करता है कि इसकी स्टेल्थ डिजाइन सक्रिय रडार ऑन होने के बावजूद पहचान को बेहद कठिन बना देती है और यह कई वास्तविक सैन्य अभियानों में साबित हो चुका है। भारत और रूस का रक्षा सहयोग दशकों पुराना है। MiG-21 से लेकर Su-30MKI और ब्रह्मोस मिसाइल तक कई परियोजनाएं दोनों देशों ने मिलकर बनाई हैं। रूस का कहना है कि Su-57 कार्यक्रम इस सहयोग का अगला अध्याय हो सकता है, जिसमें भविष्य में संयुक्त विकास और अपग्रेड की संभावनाएं भी खुलती हैं।
उधर कूटनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हैं। मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की और SCO की बैठक में हिस्सा लिया। इसी दौरान दिल्ली में रूस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार निकोलाई पात्रुशेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट की। भारत ने साफ संकेत दिए हैं कि वह अगले महीने पुतिन की यात्रा को लेकर उत्साहित है। ऐसे में यह संभावित है कि Su-57 फाइटर जेट प्रस्ताव पुतिन की भारत यात्रा का प्रमुख एजेंडा बन सकता है और आने वाले दिनों में भारत की वायु शक्ति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।



