Peter Navarre:
वाशिंगटन डीसी, एजेंसियां। अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास सलाहकार पीटर नवारो लगातार विवादित बयानबाजी कर रहे हैं। अब उनके ‘ब्राह्मण’ संबंधी बयान को लेकर अमेरिका में बसे हिन्दू संगठन खुलकर विरोध में उतर आए हैं। अमेरिकन हिन्दूज अगेंस्ट डिफेमेशन और हिन्दूपैक्ट ने ट्रंप से नवारो को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है।
हिन्दूफोबिक है बयानः
नवारो पर आरोप है कि उन्होंने हिन्दू-विरोधी टिप्पणी की, जातिगत संदर्भों का गलत इस्तेमाल किया और एक पवित्र प्रार्थना का मज़ाक उड़ाया। संगठनों का कहना है कि ऐसी बयानबाजी न केवल अमेरिका में हिन्दुओं के खिलाफ नफरत बढ़ाती है, बल्कि भारत-अमेरिका साझेदारी को भी नुकसान पहुंचाती है।
हिन्दूफोबिक और सांस्कृतिक हिंसा’…
जारी बयान में संगठनों ने नवारो की टिप्पणियों को हिन्दूफोबिक करार देते हुए कहा कि यह एक सांस्कृतिक हिंसा और लापरवाह प्रोपेगेंडा है, जिससे 100 करोड़ से ज्यादा हिन्दुओं की गरिमा खतरे में पड़ती है। चेतावनी दी गई कि इस रवैये से दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के रिश्ते कमजोर हो सकते हैं।
हिंदुओं को बांटने की कोशिशः
हिन्दूपैक्ट के कार्यकारी अध्यक्ष अजय शाह ने कहा कि नवारो हिन्दुओं को औपनिवेशिक स्क्रिप्ट के जरिए बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिकी राजनीति में ऐसे लोगों की कोई जगह नहीं है। वहीं हिन्दू प्रार्थना का मज़ाक उड़ाने को संगठन ने धार्मिक सम्मान को कमज़ोर करने जैसा बताया।
मोदी की फोटो पोस्ट कर आध्यात्मिकता का मज़ाक?
हिन्दू संगठनों ने नवारो की उस सोशल मीडिया पोस्ट पर भी आपत्ति जताई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ध्यान करते हुए चित्र का इस्तेमाल किया गया था। हिन्दूपैक्ट की अध्यक्ष दीप्ति महाजन ने कहा—“अगर निशाना हिन्दू धर्म था तो यह आस्था का अपमान है और अगर भारतीय नेतृत्व था, तो यह कूटनीतिक लापरवाही है। किसी भी सूरत में यह गंभीर उल्लंघन है।
भारत विरोधी एजेंडा?
पिछले दिनों नवारो ने कहा था कि रूस से तेल खरीदकर भारत के ब्राह्मण मुनाफा कमा रहे हैं जबकि आम भारतीयों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने भारत को ‘टैरिफ का महाराजा’ तक कह डाला। यही नहीं, यूक्रेन युद्ध को उन्होंने “मोदी वॉर” बताया और तर्क दिया कि भारत रूसी तेल खरीदकर रूस को फंडिंग कर रहा है।
भारत ने नवारो के इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ कहा था कि ऊर्जा आयात वैश्विक बाजार की वास्तविकता है और रूसी तेल खरीद उसकी रणनीतिक आवश्यकता का हिस्सा है।
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