Pakistan in vaccine crisis
इस्लामाबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान इस समय एक गंभीर वैक्सीन संकट का सामना कर रहा है, जिसने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ उसकी अर्थव्यवस्था को भी हिला कर रख दिया है। इस संकट की जड़ें पिछले साल मई में भारत के साथ हुए सैन्य तनाव के बाद लिए गए एक राजनीतिक फैसले से जुड़ी हैं, जब पाकिस्तान ने भारत से किफायती वैक्सीन की खरीद बंद करने का निर्णय लिया था।
उस वक्त यह फैसला राजनीतिक आक्रोश और कूटनीतिक तनाव के माहौल में लिया गया, लेकिन अब इसके दूरगामी और नकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। हालात यह हैं कि न केवल भारत से मिलने वाली किफायती वैक्सीन की सप्लाई पूरी तरह बंद हो चुकी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों और अन्य देशों से मिलने वाली मुफ्त या सब्सिडी वाली वैक्सीन सहायता भी धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रही है।
पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव
पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने हाल ही में इस संकट को लेकर खुलकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत से वैक्सीन सप्लाई रुकने के बाद देश की अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जो वैक्सीन पहले भारत से बेहद कम कीमत पर मिल जाती थीं, अब वही वैक्सीन पाकिस्तान को दूसरे देशों से तीन गुना तक महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही हैं।
गड़बड़ाया पाकिस्तान का स्वास्थ्य बजट
इस बढ़ी हुई लागत का सीधा असर स्वास्थ्य बजट पर पड़ रहा है, जिससे पहले से जूझ रही स्वास्थ्य व्यवस्था और कमजोर होती जा रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान हर साल लगभग 400 मिलियन डॉलर की वैक्सीन खरीद करता है। इस कुल खर्च का करीब 49 प्रतिशत हिस्सा GAVI (ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन एंड इम्यूनाइजेशन) के जरिए काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा वहन किया जाता है, जबकि शेष 51 प्रतिशत राशि पाकिस्तान सरकार को अपने संसाधनों से चुकानी पड़ती है।
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यदि देश में जल्द वैक्सीन का स्थानीय उत्पादन शुरू नहीं किया गया, तो 2031 तक यह खर्च बढ़कर 1.2 अरब डॉलर सालाना से भी अधिक हो सकता है। यही नहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी साफ कर दिया है कि 2031 तक अंतरराष्ट्रीय वैक्सीन सहायता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, जिससे पाकिस्तान को पूरा बोझ खुद उठाना पड़ेगा।
GAVI के माध्यम से सस्ती वैक्सीन पाता है पाकिस्तान
पाकिस्तान लंबे समय से GAVI के माध्यम से सस्ती वैक्सीन हासिल करता रहा है, जिनका एक बड़ा हिस्सा भारत में निर्मित होता था। भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते भले ही तनावपूर्ण रहे हों, लेकिन इसके बावजूद वर्षों तक यह आपूर्ति जारी रही। यहां तक कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी GAVI के जरिए भारत में बनी वैक्सीन पाकिस्तान तक पहुंचती रहीं। भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों ने कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाली वैक्सीन उपलब्ध कराईं, जिससे पाकिस्तान का राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम सुचारु रूप से चलता रहा।
पाकिस्तान में नहीं बनती वैक्सीन
हालांकि, पिछले साल मई में हुए सैन्य संघर्ष के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। इसके बाद भारत से होने वाली वैक्सीन सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई। इसका सीधा असर पाकिस्तान के इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम पर पड़ा। पाकिस्तान अपने नागरिकों को कुल 13 प्रकार की वैक्सीन उपलब्ध कराता है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से एक भी वैक्सीन का उत्पादन देश के भीतर नहीं होता। पूरी व्यवस्था आयात पर निर्भर है।
पाकिस्तान अपनी वैक्सीन बनाने की कोशश मे
इस गहराते संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान अब वैक्सीन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के विकल्प तलाश रहा है। स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल के अनुसार, सरकार स्थानीय स्तर पर वैक्सीन निर्माण शुरू करने के लिए सऊदी अरब के साथ साझेदारी की संभावनाओं पर विचार कर रही है। सरकार का मानना है कि यदि देश में वैक्सीन उत्पादन शुरू हो जाता है, तो भविष्य में न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी, बल्कि ऐसे राजनीतिक और कूटनीतिक संकटों से भी बचा जा सकेगा।

















