वाशिंगटन, एजेंसियां। इंसान के शरीर में माइक्रो RNA के बिना सेल और टिश्यू डेवलप नहीं हो सकते। माइक्रो RNA में असाधारण बदलाव होने की वजह से कैंसर, डायबिटीज जैसी बीमारियां हो सकती हैं। माइक्रो RNA की जीन कोडिंग में म्यूटेशन होने की वजह से इंसान के शरीर में सुनने की क्षमता, आंखों और शारीरिक बनावट में समस्या आती है।
इन्हें मिला नोबेल पुरस्कारः
अमेरिकी वैज्ञानिक विक्टर एम्ब्रोस और गैरी रुवकुन को मेडिसिन का नोबेल प्राइज मिला है। दोनों को ये पुरस्कार माइक्रो RNA (राइबोन्यूक्लिक एसिड) की खोज के लिए दिया गया है। दोनों जीन साइंटिस्ट्स ने 1993 में माइक्रो RNA की खोज की थी। इससे पता चलता है कि शरीर में कोशिकाएं कैसे बनती और काम करती हैं। आज फिजिक्स के नोबेल पुस्कार विजेताओं का ऐलान होगा। 10 दिसंबर को विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
123 साल से मिल रहा है नोबेल प्राइज:
1901 में नोबेल प्राइज की शुरुआत हुई थी, तब से 2024 तक मेडिसिन की फील्ड में 229 लोगों को इससे सम्मानित किया जा चुका है। 27 नवंबर 1895 को साइंटिंस्ट और इन्वेंटर अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी आखिरी वसीयत लिखी थी। इसी के आधार पर नोबेल पुरस्कारों की स्थापना हुई।
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