Firing in California:
वाशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर मोहम्मद निजामुद्दीन की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई। तेलंगाना के रहने वाले निजामुद्दीन का अपने रूममेट के साथ विवाद हो गया था, जिसके बाद पुलिस को 911 पर कॉल मिली। सांता क्लारा पुलिस का कहना है कि जब अधिकारी मौके पर पहुंचे तो उन्होंने निजामुद्दीन को चाकू लिए खड़ा पाया। चेतावनी देने के बावजूद उसने चाकू नीचे नहीं रखा, जिसके बाद पुलिस ने उस पर चार गोलियां दागीं। रूममेट को भी गंभीर चोटें आईं और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह घटना 3 सितंबर को हुई थी।
नौकरी और नस्लीय उत्पीड़न को लेकर की थी शिकायत
निजामुद्दीन ने अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स किया था और कैलिफोर्निया की एक कंपनी में काम कर रहे थे। हालांकि, कुछ समय पहले उनकी नौकरी चली गई। उन्होंने लिंक्डइन पर पोस्ट कर आरोप लगाया था कि उन्हें गलत तरीके से निकाला गया और वेतन में भी धोखाधड़ी हुई। इसके साथ ही उन्होंने कार्यस्थल पर नस्लीय उत्पीड़न और भेदभाव का भी आरोप लगाया था।
परिवार ने विदेश मंत्रालय से मांगी मदद
इस घटना के बाद निजामुद्दीन के परिवार ने गहरा दुख जताते हुए विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाई है। परिवार चाहता है कि उनका पार्थिव शरीर भारत लाया जाए। मजलिस बचाओ तहरीक के प्रवक्ता अमजद उल्लाह खान ने निजामुद्दीन के परिवार से मुलाकात की और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर मामले की गंभीरता से जांच कराने की अपील की।
यह मामला भारतीय समुदाय में चिंता का विषय बन गया है, जहां लोग इसे नस्लीय उत्पीड़न और पुलिस की सख्त कार्रवाई से जोड़कर देख रहे हैं।
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