India attacks Pakistan: UN में भारत का पाक पर हमला , कहा – “अपने ही लोगों पर गिराता है बम “

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India attacks Pakistan:

न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन, एजेंसियां। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर और महिलाओं, शांति एवं सुरक्षा पर चली खुली बहस के दौरान भारत ने पाकिस्तान के विरुद्ध तीखा रुख अपनाया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनि हरीश ने पाकिस्तानी दावों और प्रचार को भ्रामक करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान “ऐसा देश है जो अपने ही लोगों पर बम गिराता और नरसंहार करता है”। उन्होंने 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय पाकिस्तान की सेना द्वारा पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन और महिलाओं के साथ दुष्कर्म की योजना की गई कार्रवाइयां हुई थीं।

हरीश ने बहस में पुख्ता शब्दों में कहा

हरीश ने बहस में पुख्ता शब्दों में कहा, “जो देश अपने नागरिकों के साथ ऐसी क्रूरता कर चुका है — चार लाख महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म जैसे अपराधों का उल्लेख करते हुए — वह दूसरों को नैतिक उपदेश देने का अधिकार नहीं रखता।” विदेशशास्त्री का यह बयान उस वक्त आया जब एक पाकिस्तानी अधिकारी ने कश्मीरी महिलाओं के कथित उत्पीड़न के दावे दोहराए थे। हरीश ने पाकिस्तान पर “ध्यान भटकाने” और “झूठा प्रचार” फैलाने का आरोप भी लगाया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब पाकिस्तान के दावों को समझने लगा है।

इस वार्तालाप की पृष्ठभूमि में हालिया सुरक्षा घटनाओं और शब्दबाजी ने तनाव और बढ़ाया है। खैबर-पख्तूनख्वा में सितंबर अंत में दर्ज बमबारी में दर्जनों नागरिकों की मौत की खबरों के बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए। पाक के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत के खिलाफ कड़े हमलावर बयान दिए, जिसमें उन्होंने कहा था कि “अबकी बार जंग हुई तो भारत अपने लड़ाकू विमानों के मलबे के नीचे दब जाएगा।” दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR ने भारतीय रक्षा टिप्पणीकारों पर भी “जंग को बढ़ावा देने” का आरोप लगाया और दोनों ओर से कड़े शब्दों का आदान-प्रदान जारी रहा।

परिषद की पिछली बैठकों में

जिनेवा में मानवाधिकार परिषद की पिछली बैठकों में भी भारत ने पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठाए थे। भारतीय अधिकारी के.एस. मोहम्मद हुसैन ने वहां कहा कि पाकिस्तान “धर्म और जातीय अल्पसंख्यकों” के साथ होने वाले दमन के मामले में दुनिया के खराब रेकॉर्ड वाले देशों में बैठता है, और इसलिए उसे दूसरों को मानवाधिकार पढ़ाने का नैतिक अधिकार नहीं होना चाहिए।

क्या कहता है इतिहास ?

इतिहास के पन्नों में दर्ज ऑपरेशन सर्चलाइट (25 मार्च 1971) भी बार-बार संदर्भित किया जा रहा है: सीधी तौर पर ढाका, विश्वविद्यालय परिसर और नागरिक इलाकों पर हुए हमलों, बंध्यकता, और तबाही जिनके परिणामस्वरूप अंतिम चरण में बांग्लादेश का निर्माण हुआ। हरीश ने कहा कि इन ऐतिहासिक घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता और वे पाकिस्तान के कथित नैतिक आचरण पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।

कूटनीतिक गलियारों में इस बहस के असर पर भी नज़रों है। UNSC मंच पर चली तीखी वाणी से क्षेत्रीय तनाव पर वैश्विक फोकस बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दोनों देशों द्वारा जारी बयानबाजी को कूटनीतिक स्तर पर नियंत्रित करने के प्रयासों के बावजूद, मामलों का तेज़ी से राजनीतिकरण संभाव्य है और यह दक्षिण एशिया में सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना सकता है।

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