जिनेवा। भारत ने एक बार फिर से UNSC में बदलाव की मांग उठाई है।
UN में भारत की परमानेंट प्रतिनिधि रुचिरा कम्बोज ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधारों पर चर्चा 1990 के दशक में शुरू हुई थी।
दुनिया और हमारी आने वाली पीढ़ियों को अब और कितना इंतजार करना होगा? हम और इंतजार नहीं कर सकते।
रुचिरा ने कहा कि साल 2000 में पहली बार मिलेनियल समिट में वर्ल्ड लीडर्स ने UNSC में सुधार का संकल्प लिया था।
इस बात को करीब 24 साल बीत चुके हैं। अब भी अगर बदलाव नहीं हुए, तो UNSC गुमनामी के गर्त में चला जायेगा।
बता दें कि UNSC के 5 परमानेंट मेंबर हैं अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन। इनमें 4 देश भारत का समर्थन करने को तैयार हैं, लेकिन चीन रोड़ा बन रहा है।
रुचिरा कम्बोज ने सुझाव दिया कि अगले साल UN की 80वीं सालगिरह है और सितंबर में एक अहम शिखर सम्मेलन होने वाला है।
ऐसे मौकों पर इन जरूरी सुधारों को पेश किया जाना चाहिए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि हमें अफ्रीका समेत युवा और भविष्य की पीढ़ियों की आवाज पर ध्यान देते हुए सुधार करने की जरूरत है
रुचिरा ने कहा कि UNSC में बदलाव के नाम पर सिर्फ नॉन-परमानेंट सदस्यों को बढ़ाने से संगठन में असमानताएं बढ़ सकती हैं।
परिषद की वैधता में सुधार के लिए इसके कम्पोजिशन में सभी सदस्यों की समान भागीदारी जरूरी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वीटो पावर UNSC में सुधार को लेकर अड़चन डालने का काम न करे।
भारत के इन सुझावों का UNSC के स्थायी सदस्य ब्रिटेन ने समर्थन किया। इसके अलावा G4 के सहयोगी देश जैसे ब्राजील, जापान और जर्मनी ने भी 193 सदस्य देशों के विचारों की अहमियत पर जोर देते हुए नॉन-परमानेंट केटेगरी में ज्यादा प्रतिनिधित्व के लिए भारत के बयान का समर्थन किया।
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