US protest Dipu Chandra Das murder: बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या पर अमेरिकी सांसदों का कड़ा विरोध

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US protest Dipu Chandra Das murder

वाशिंगटन, एजेंसियां। बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई क्रूर हत्या के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश देखने को मिल रहा है। अमेरिका के कई सांसदों ने इस जघन्य घटना की कड़ी निंदा करते हुए बांग्लादेश सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। सांसदों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं देश में बढ़ती अस्थिरता और अल्पसंख्यकों के खिलाफ लक्षित हिंसा को दर्शाती हैं।

‘हिंदू युवक की हत्या से स्तब्ध हूं’

इलिनॉय से डेमोक्रेटिक कांग्रेसमैन राजा कृष्णमूर्ति ने दीपू चंद्र दास की हत्या को टारगेटेड हिंसा करार देते हुए गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “मैं बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई हत्या से स्तब्ध हूं। यह घटना उस समय हुई है, जब देश पहले से ही अस्थिरता और अशांति के दौर से गुजर रहा है।” कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का संकेत है।

दोषियों को मिले कड़ी से कड़ी सजा

राजा कृष्णमूर्ति ने यह भी कहा कि भले ही इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं, लेकिन बांग्लादेश सरकार को निष्पक्ष, पारदर्शी और ईमानदार जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

न्यूयॉर्क की विधायक जेनिफर राजकुमार ने जताई चिंता

न्यूयॉर्क विधानसभा की सदस्य जेनिफर राजकुमार ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने दीपू चंद्र दास की हत्या को हाल के समय की सबसे क्रूर घटनाओं में से एक बताया, जिसमें भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या की, शव को जलाया और सड़क पर छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि इस मामले में अब तक 12 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

आंकड़े बढ़ती हिंसा की ओर इशारा करते हैं

जेनिफर राजकुमार ने ‘बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद’ के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अगस्त 2024 से जुलाई 2025 के बीच अल्पसंख्यकों के खिलाफ 2,442 हिंसक घटनाएं हुईं और 150 से अधिक मंदिरों में तोड़फोड़ की गई। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं और अंतरिम सरकार को तुरंत प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

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