Trump foreign policy 2026
काराकास, एजेंसियां। वेनेजुएला में सफल सैन्य ऑपरेशन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास काफी बढ़ा हुआ नजर आ रहा है। इसी कड़ी में अब उनकी नजर ग्रीनलैंड पर टिक गई है। ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड पर अमेरिकी प्रभाव या नियंत्रण स्थापित करने की संभावनाओं पर दोबारा गंभीरता से काम करता दिख रहा है। इसी उद्देश्य से अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अगले हफ्ते डेनमार्क की यात्रा पर जाने वाले हैं, जहां इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।
डेनमार्क दौरा केवल औपचारिक नहीं
सूत्रों के मुताबिक, मार्को रूबियो का यह दौरा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगा। ग्रीनलैंड को लेकर ‘हाई-स्टेक’ चर्चा हो सकती है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्व-शासित क्षेत्र है और इसकी भौगोलिक स्थिति आर्कटिक क्षेत्र में बेहद अहम मानी जाती है। अमेरिका का मानना है कि चीन और रूस की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर इस क्षेत्र में अपनी सुरक्षा मजबूत करना जरूरी है।
सैन्य नहीं, खरीद का रास्ता?
हालांकि ट्रंप यह संकेत दे चुके हैं कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका सैन्य विकल्प से भी पीछे नहीं हटेगा, लेकिन विदेश मंत्री रूबियो ने सांसदों के एक समूह से कहा है कि प्रशासन की प्राथमिकता ग्रीनलैंड को खरीदने की है, न कि बल प्रयोग करने की। यह बयान बताता है कि अमेरिका फिलहाल कूटनीतिक और आर्थिक रास्ते को तरजीह देना चाहता है।
ट्रंप का पुराना एजेंडा फिर सक्रिय
गौरतलब है कि अपने पहले कार्यकाल में 2019 में भी ट्रंप ने ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रस्ताव रखा था, जिसे डेनमार्क ने ‘बेतुका’ करार देकर खारिज कर दिया था। अब सत्ता में वापसी के बाद ट्रंप एक बार फिर इसी एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज संसाधनों की भरमार है, जो अमेरिका के लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं।
नाटो में बढ़ सकता है तनाव
पिछले महीने ट्रंप ने ग्रीनलैंड के लिए एक विशेष दूत नियुक्त करने का भी ऐलान किया था। इस पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने साफ कहा कि उनकी क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने जबरदस्ती की कोशिश की, तो नाटो गठबंधन पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि क्या ट्रंप की ग्रीनलैंड योजना वास्तव में कामयाब हो पाएगी।

