Global protest China
बेजिंग, एजेंसियां। चीन में कथित तौर पर जबरन अंग निकाले जाने के आरोपों को लेकर दुनिया भर में विरोध तेज हो गया है। इस गंभीर मानवाधिकार मुद्दे पर अब तक 5 लाख से अधिक लोगों ने एक अंतरराष्ट्रीय याचिका पर हस्ताक्षर कर चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। द एपोक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, Doctors Against Forced Organ Harvesting (DAFOH) के नेतृत्व में चलाई जा रही इस मुहिम को 34 देशों के लोगों का समर्थन मिला है और हस्ताक्षरों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
G7 देशों और भारत से हस्तक्षेप की अपील
इस याचिका का उद्देश्य केवल विरोध दर्ज कराना नहीं, बल्कि दुनिया की बड़ी ताकतों से ठोस कदम उठाने की मांग करना है। याचिका में G7 देशों—अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन—के साथ-साथ भारत, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, इजराइल, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया और ताइवान से चीन के खिलाफ खुलकर बोलने की अपील की गई है। कुल 14 देशों से एकजुट होकर इस कथित अमानवीय प्रथा को रोकने की मांग की गई है।
किस पर लगे हैं आरोप
DAFOH और इंटरनेशनल कोएलिशन टू एंड ट्रांसप्लांट एब्यूज इन चाइना का दावा है कि चीन में ‘प्रिजनर्स ऑफ कॉन्शियंस’ यानी विचारबंदियों के अंग जबरन निकाले जाते हैं। इनमें फालुन गोंग के अनुयायी, उइगर मुस्लिम और अन्य धार्मिक व जातीय अल्पसंख्यक शामिल बताए जाते हैं। आरोप है कि इन लोगों को हिरासत में रखकर उनके अंग ट्रांसप्लांट के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
सांसद और डॉक्टर भी आए सामने
इस मुद्दे पर दुनिया भर के कई सांसदों और डॉक्टरों ने भी समर्थन जताया है। DAFOH के कार्यकारी निदेशक डॉ. टॉर्स्टन ट्रे ने कहा कि यह मानवता के खिलाफ अपराध है और जनता चाहती है कि सरकारें इसे नजरअंदाज न करें। याचिका में 2019 की लंदन स्थित चाइना ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है, जिसमें बड़े पैमाने पर जबरन अंग निकालने की बात कही गई थी।
आगे की रणनीति
DAFOH का लक्ष्य जून 2026 तक 10 लाख हस्ताक्षर जुटाने का है। संगठन ने मांग की है कि संबंधित देश चीन की इस प्रथा की खुली निंदा करें, अपने नागरिकों को वहां ट्रांसप्लांट कराने से रोकें और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच व कार्रवाई शुरू करें।
