Epstein case latest news: आत्महत्या या हत्या? एपस्टीन केस में डॉक्टर के बयान से उठ रहा कई सवाल

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Epstein case latest news:

वाशिंगटन, एजेंसियां। यौन तस्करी के आरोपों में गिरफ्तार वित्तीय कारोबारी Jeffrey Epstein की 2019 में जेल में हुई मौत को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। एपस्टीन के शव परीक्षण का निरीक्षण करने वाले फॉरेंसिक विशेषज्ञ Michael Baden ने दावा किया है कि उनकी राय में एपस्टीन की मौत फांसी लगाने से नहीं बल्कि गला घोंटने से हुई हो सकती है।ब्रिटिश अख़बार The Telegraph को दिए इंटरव्यू में बैडेन ने कहा कि उपलब्ध चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य तथ्यों को देखते हुए मौत के कारण की आगे जांच जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पोस्टमार्टम के दौरान कुछ ऐसे संकेत मिले थे जो आत्महत्या की सामान्य परिस्थितियों से अलग दिखाई देते हैं।

आधिकारिक रिपोर्ट में आत्महत्या का निष्कर्ष

एपस्टीन अगस्त 2019 में New York City की एक संघीय जेल में अपने सेल में मृत पाए गए थे, जहां वे यौन तस्करी के आरोपों में मुकदमे की प्रतीक्षा कर रहे थे। उस समय मेडिकल एग्जामिनर कार्यालय ने उनकी मृत्यु को फांसी लगाकर आत्महत्या बताया था।तत्कालीन मुख्य चिकित्सा परीक्षक Barbara Sampson अपने निष्कर्ष पर आज भी कायम हैं। हालांकि बैडेन, जो एपस्टीन के परिवार की ओर से पर्यवेक्षक के रूप में पोस्टमार्टम में मौजूद थे, ने शुरुआत से ही मौत के कारण को “अस्पष्ट” बताया था।

रिपोर्ट के अनुसार

रिपोर्ट के अनुसार, अगली सुबह दो जेलकर्मियों ने एपस्टीन को सेल में बेहोश पाया। वह ऊपरी चारपाई के पास बैठी हुई स्थिति में लटका हुआ था और उसके गले में कपड़े या चादर जैसी नारंगी पट्टी बंधी हुई थी। गार्डों ने उसे नीचे उतारा और सीपीआर देने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।बाद में जेल के दो गार्डों पर रिकॉर्ड में हेरफेर करने का आरोप लगा था। जांच के दौरान सामने आए वीडियो लॉग में यह भी उल्लेख किया गया कि घटना से एक रात पहले एपस्टीन के अलग-थलग सेल की ओर “नारंगी रंग की एक झलक” देखी गई थी, जिसने मामले को और रहस्यमय बना दिया।

बहस अभी भी जारी

एपस्टीन की मौत को लेकर साजिश की आशंकाएं और सवाल वर्षों बाद भी खत्म नहीं हुए हैं। बैडेन के ताजा बयान ने इस बहस को फिर से हवा दे दी है। हालांकि आधिकारिक एजेंसियां अब तक आत्महत्या के निष्कर्ष को नहीं बदल रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मामले की पारदर्शिता के लिए अतिरिक्त जांच की मांग आगे भी उठ सकती है।

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