Bangladesh new cabinet:
ढाका, एजेंसियां। बांग्लादेश की राजनीति में नए दौर की शुरुआत हो चुकी है। आम चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है। उनके साथ 49 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने भी शपथ ग्रहण किया। इस नई सरकार की खास बात यह है कि इसमें अल्पसंख्यक समुदायों को भी प्रतिनिधित्व दिया गया है। मंत्रिमंडल में एक हिंदू और एक बौद्ध नेता को शामिल किया गया है, जिससे समावेशी राजनीति का संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है।
कौन हैं निताई रॉय चौधरी?
हिंदू समुदाय से आने वाले निताई रॉय चौधरी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (Bangladesh Nationalist Party) के वरिष्ठ नेता हैं। वे पार्टी की नीति-निर्माण संबंधी स्थायी समिति के सदस्य और शीर्ष नेतृत्व के सलाहकार माने जाते हैं। जनवरी 1949 में जन्मे निताई रॉय चौधरी पेशे से एक प्रतिष्ठित वकील हैं और पहले भी सांसद रह चुके हैं। उन्होंने पश्चिमी मगुरा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। पार्टी के भीतर उनकी रणनीतिक भूमिका और अनुभव को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।
दीपेन दीवान चकमा को भी मिली जगह
बौद्ध समुदाय का प्रतिनिधित्व दीपेन दीवान चकमा कर रहे हैं। वे चकमा जातीय अल्पसंख्यक समूह से आते हैं और दक्षिण-पूर्वी रंगमती हिल्स जिले से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। 8 जून 1963 को जन्मे दीपेन दीवान चकमा भी पेशे से वकील और सक्रिय राजनीतिज्ञ हैं। वे आदिवासी और पहाड़ी इलाकों से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे हैं।
अल्पसंख्यकों की बढ़ी भागीदारी
हालिया संसदीय चुनावों में अल्पसंख्यक समुदाय के चार उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी – दो हिंदू और दो बौद्ध नेता। इनमें से एक-एक नेता को कैबिनेट में शामिल किया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम सरकार की समावेशी छवि को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 25 कैबिनेट मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों के साथ सरकार बनाई है। विभागों का अंतिम बंटवारा अभी घोषित नहीं हुआ है। शपथ ग्रहण समारोह संसद परिसर में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे। नई सरकार से देश में राजनीतिक स्थिरता और संतुलित प्रतिनिधित्व की उम्मीदें जताई जा रही हैं।












