Bangladesh Election
ढाका, एजेंसियां। बांग्लादेश में फरवरी 2026 के चुनाव से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दल बीएनपी और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट के बीच बड़ा मतभेद सामने आया है। यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ गई है।
BNP ने राष्ट्रपति हटाने की मांग का किया विरोध
बीएनपी ने छात्र संगठनों की मांग 1972 के संविधान को खत्म करने और राष्ट्रपति को हटाने—का कड़ा विरोध किया है। बीएनपी नेताओं का कहना है कि इस समय राष्ट्रपति पद खाली करने से “संवैधानिक शून्य” और बड़े राष्ट्रीय संकट की स्थिति पैदा होगी। पार्टी ने चेतावनी दी कि कोई भी समूह “राजनीतिक या संवैधानिक अराजकता” पैदा करने की कोशिश करेगा तो लोकतांत्रिक दल मिलकर उसका विरोध करेंगे। बीएनपी नेताओं ने मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ बैठक के बाद सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
छात्र आंदोलन की सख्त मांग—राष्ट्रपति तुरंत हटें
इसके विपरीत, छात्र आंदोलन और जातीय नागरिक कमिटी 1972 के संविधान को “फासीवादी ढांचे” का आधार बताते हुए राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन को तुरंत हटाने की मांग पर अड़े हैं। उन्होंने सभी दलों से राष्ट्रीय एकता के लिए इस आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की और साफ कहा कि जो इनके साथ नहीं आएगा, उसका बहिष्कार किया जाएगा।
मुद्दे की शुरुआत कैसे हुई?
विवाद तब शुरू हुआ, जब एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति ने दावा किया कि उन्हें पूर्व पीएम शेख हसीना के इस्तीफे की सूचना मिली थी, लेकिन दस्तावेज नहीं मिले। इसके बाद सरकार के सलाहकारों और छात्र संगठनों ने उन्हें “झूठ बोलने” और “मानसिक रूप से अक्षम” करार दिया और इस्तीफे की मांग तेज हो गई।
राष्ट्रपति चुनाव बाद इस्तीफे को तैयार
इस बीच, शाहाबुद्दीन ने स्पष्ट किया है कि वे फरवरी चुनाव के बाद पद छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार द्वारा “अपमानित” महसूस करने की वजह से अब वे पद पर नहीं रहना चाहते।

