Nepal crisis: नेपाल संकट में अमेरिका के हस्तक्षेप के आरोप: केपी ओली के पतन के पीछे उठे सवाल

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Nepal crisis:

काठमांडू, एजेंसियां। नेपाल में राजनीतिक संकट तेज हो गया है, जब प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को दो दिन के भीतर पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद सेना के समर्थन से सुशीला कार्की की अगुवाई में अंतरिम सरकार बनी। इस पूरी घटना के पीछे अमेरिका की गुप्त भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि सीधे तौर पर अमेरिकी हस्तक्षेप साबित नहीं हुआ है, लेकिन मौन सहमति और समर्थन के संकेत मिल रहे हैं।

इतिहास में अमेरिका का नेपाल में हस्तक्षेप

संडे गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने शीत युद्ध के दौरान नेपाल में चीन विरोधी गुटों का समर्थन किया था। 1960 के दशक में तिब्बती शरणार्थियों को हथियार और प्रशिक्षण देकर मस्टैंग गुरिल्ला बल का गठन किया गया था। बाद में, अमेरिका ने इस बल का समर्थन छोड़ दिया। 9/11 के बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ नेपाल में सैन्य उपस्थिति बढ़ाई और माओवादी विद्रोहियों को आतंकवादी घोषित किया। काठमांडू को भारी सैन्य सहायता दी गई और रॉयल नेपाल आर्मी का आकार दोगुना हुआ।

केपी ओली सरकार के पतन में अमेरिकी हाथ?

विशेषज्ञों और वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि इतनी बड़ी हलचल बिना किसी बाहरी ताकत के संभव नहीं थी। इस आंदोलन में कोई बड़ा नेपाली राजनीतिक चेहरा सामने नहीं आया, जिससे संदेह और गहराया। एक नेपाली अधिकारी ने कहा कि यदि नई व्यवस्था अनुमति देती है तो वे सबूत इकट्ठा करेंगे कि विदेशी ताकतें इसमें शामिल थीं।

हालांकि अभी तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन इतिहास और हाल की घटनाओं को देखकर यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अमेरिका की गुप्त भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में रही हो सकती है। नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में अब यह सवाल अहम बन गया है कि क्या वॉशिंगटन ने सत्ता परिवर्तन की चाबी घुमाई।

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