क्या आप जानते है की ट्रेन में लोको पायलट हॉर्न के अलग अलग आवाजों से अपना संदेश स्टेशन के लोगो तक पहुंचाते हैं।
जब आप एक छोटा सा 'बीप' सुनें, तो समझ जाइए कि ट्रेन यार्ड में है। यह सफाई और मेंटेनेंस स्टाफ के लिए संकेत है कि अब काम खत्म करें, इंजन हिलने वाला है।
स्टेशन पर अक्सर सुना जाने वाला यह हॉर्न ड्राइवर का गार्ड को इशारा है। "मैं तैयार हूँ, क्या सिग्नल मिल गया है?" गार्ड के ओके कहते ही ट्रेन चल पड़ती है।
सावधान! यह एक इमरजेंसी संकेत है। इसका मतलब है कि ड्राइवर ने ट्रेन पर से अपना कंट्रोल खो दिया है। गार्ड को तुरंत अपने केबिन से 'हैंड ब्रेक' खींचने की हिदायत दी जाती है।
अगर ट्रेन बीच रास्ते में रुक जाए और 4 बार छोटे हॉर्न बजे, तो समझ लें कि इंजन में कोई तकनीकी खराबी आ गई है या आगे पटरी पर कोई रुकावट है।
जब ट्रेन किसी स्टेशन पर नहीं रुकती, तो वह प्लेटफार्म पर आने से पहले यह हॉर्न बजाती है। यह यात्रियों के लिए चेतावनी है: "ट्रेन तूफ़ान की रफ़्तार से गुजरने वाली है, दूर रहें!"
यह चैन पुलिंग (ACP) का संकेत है। जब कोई यात्री अलार्म चैन खींचता है, तो ड्राइवर यह हॉर्न बजाकर गार्ड और RPF को सूचित करता है कि ट्रेन किस वजह से रुकी है।
फाटक (Level Crossing) आने से पहले ड्राइवर यह हॉर्न बजाता है ताकि सड़क पर चलने वाले वाहन और लोग पटरी से दूर हो जाएं। सुरक्षा सबसे पहले!
यह सबसे डरावना संकेत है। इसका मतलब है कोई बड़ा खतरा। लोको पायलट यह तब बजाता है जब सामने कोई बड़ी दुर्घटना होने वाली हो या पटरी टूटी हुई दिखे।
ट्रेन का हॉर्न सिर्फ शोर नहीं, पटरियों की सुरक्षा का कवच है। भारतीय रेल की इस अद्भुत भाषा के बारे में क्या आपको पहले पता था? शेयर करें और दूसरों को भी बताएं!