Thunderclap, Lightning: वज्रपात से बचने के उपाय

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वज्रपात से बचने के उपाय

वज्रपात से कैसे बचें और क्या सावधानियां बरतें

बारिश के दौरान वज्रपात होना या बिजली गिरना आम बात है। खास कर झारखंड में इसकी अधिकता तो कई जान ले चुकी है।

यहां इतनी ज्यादा बिजली गिरती है कि राज्य सरकार की ओर से स्कूलों में तड़ित चालक लगवाये गये हैं।

इतना ही सरकार ने वज्रपात के दौरान हुई मृत्यु के लिए चार लाख रुपये तक का मुआवजा तक घोषित करना पड़ा है।

बावजूद इसके दुर्टनाएं हो रही हैं। ऐसे में लोगों को इस आपदा से बचने के लिए हमेशा ही सतर्क किया जाता रहा है।

अभी गर्मी का मौसम है। बावजूद इसके रह रह कर बारिश हो रही है और ठनका भी गिर रहा है।

झारखंड के कई जिलों में रह रह कर बारिश हो रही है। जैसे ही बारिश शुरू होती है, ग्रामीण को गर्मी से राहत मिलने की खुशी तो होती है, साथ ही वज्रपात के कहर से वे सिहर जाते हैं।

जब आसमान से बिजली गिरती है, जिसे आकाशीय बिजली, वज्रपात या ठनका भी कहते हैं, इसके गिरने से आमजन प्रभावित होते हैं।

खेतों में काम कर रहे किसानों को कई बार अपनी जान तक गवानी पड़ी है। आज हम बतायेंगे कि इस आपदा से कैसे बच सकते हैं और इसके लिए क्या करें और क्या ना करें।

क्या है वज्रपातः

आकाशीय बिजली का गिरना एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसमें पलक झपकते ही लोगों की जान चली जाती है।

अक्सर बारिश के समय आसमान में बिजली कड़कती और चमकती है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, आकाश में मौजूद बादलों के घर्षण से एक बिजली उत्पन्न होती है, जिससे नेगेटिव चार्ज उत्पन्न होता है।

वहीं पृथ्वी में पहले से पॉजिटिव चार्ज मौजूद होता है। ऐसे में धरती और आकाश के दोनों नेगेटिव एवं पॉजिटिव चार्ज एक दूसरे की तरफ आकर्षित होते हैं।

जब इन दोनों चार्जों के बीच में कोई कंडक्टर आता है, तो इलेक्ट्रिक डिस्चार्ज होता है। लेकिन, आसमान में कोई कंडक्टर नहीं होता है, तो यही इलेक्ट्रिक डिस्चार्ज ठनका के रूप में धरती पर गिरता है। आकाशीय बिजली को ठनका या वज्रपात भी कहते हैं।

कहां गिरता है ठनकाः

आमतौर पर वज्रपात होने की सबसे अधिक संभावना ऊंचे इलाके जैसे पहाड़ या कोई ऊंचा पेड़ होता है।

इसके साथ ही उन इलाकों में भी वज्रपात की संभावना ज्यादा होती है, जहां पानी अधिकांश मात्रा में उपलब्ध हो।

पानी बिजली के लिए एक कंडक्टर के रूप में काम करता है। इसलिए पानी के स्त्रोत के आस पास वज्रपात होने का खतरा अधिक होता है।

वज्रपात से बचने के लिए क्या करेः

• यदि आप खुले स्थान पर हैं तो जल्द से जल्द किसी पक्के मकान में शरण लें।

• सफर के दौरान अपने वाहन में ही बने रहें।

• यदि आप जंगल में हों, तो छोटे एवं घने पेड़ों की शरण में चले जायें।

• बिजली की सुचालक वस्तुएं एवं धातु से बने कृषि यंत्र-डंडा आदि से अपने को दूर कर लें।

• घायल व्यक्ति को तत्काल नजदीकी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र ले जायें।

• स्थानीय रेडियो एवं अन्य संचार साधनों से मौसम की जानकारी प्राप्त करते रहें।

खेत खलिहान में हों, तो क्या करेः

यदि खेत खलिहान में काम करने के दौरान बिजली गिरे और किसी सुरक्षित स्थान की शरण न ले पाये हों, तो सबसे पहले आप जहां है वहीं रहें, हो सके तो पैरों के नीचे सूखी चीजें जैसे-लकड़ी, प्लास्टिक, बोरा या सूखे पत्ते रख लें।

दोनो पैरों को आपस में सटा लें, दोनो हाथों को घुटनों पर रख कर अपने सिर को जमीन के तरफ झुका लें।

अपने कान बंद करें और सिर को जमीन से न सटने दें। जमीन पर बिलकुल ही न लेटें।

ठनका गिरने पर क्या ना करेः

• अगर आप घर पर हैं तो खिड़कियों, दरवाजे, बरामदे के समीप और छत पर न जायें।

• पानी का नल फ्रिज, टेलीफोन आदि को न छूएं।

• तालाब और जलाशय के समीप न जायें।

• बिजली के उपकरण या तार के संपर्क से बचें।

• बिजली के उपकरणों का बिजली के संपर्क से हटा दें।

• समूह में न खड़े हों, बल्कि अलग-अल खड़े रहे।

• पैदल जा रहे हों, तो धातु की डंडी वाले छातों का उपयोग न करें।

• बाइक, बिजली या टेलीफोन का खंभा, तार की बाड़, मशीन आदि से दूर रहें।

• ऊंची इमारतें, बिजली एवं टेलीफोन के खंभो के नीचे कभी भी शरण नहीं लें।

वज्रपात के चपेट में आने पर क्या करेः

वज्रपात से पीड़ित व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देने से उनकी जान बच सकती है। ऐसी स्थिति में पीड़ित और बचावकर्ता दोनों हीं निरंतर बिजली के खतरे से अवगत रहें।

यदि आप पेड़ या खुले स्थान पर हैं तो पीड़ित को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। दरअसल, किसी व्यक्ति पर आकाशीय बिजली गिरती है, तो इंसान की एनर्जी खत्म हो जाती है।

दिल को झटका लगता है। दिल की धड़कन बंद हो जाती है या तो बेहद धीमा हो जाता है और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।

ऐसे में यदि किसी व्यक्ति के दिल की धड़कन बंद होने लगे तो उसे तुरंत CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) दें।

उसके हथेलियों और तलवे को जोर-जोर से रगड़ें। इसके साथ ही तत्काल प्राथमिक चिकित्सा देने की व्यवस्था करें। आपातकालीन सेवा को तुरंत 108 पर सूचित करें।

ये वज्रपात के संकेतः

तेज हवा, काले बादल या गड़गड़ाहट की आवाज आकाशीय वज्रपात का संकेत देते हैं। यदि आकाश से गर्जन सुनाई दे रही हो, तो आप वज्रपात वाले स्थल से करीब हैं।

यदि आपके गर्दन के पीछे का बाल खड़ा हो गया हो, तो इसका मतलब यह है कि बिजली गिरना तय है और यह आपके स्थल के आस पास ही होगा।

इसके साथ ही मौसम विभाग के वेब पोटल www.imdjharkhand.gov.in पर जिलावार चेतावनी प्राप्त की जा सकती है।

इसके अलावा झारखंड मौसम विभाग द्वारा आकाशीय बिजली या वज्रपात की संभावना की जानकारी 24 घंटे पहले दे दी जाती है।

वज्रपात कैसे नुकसान पहुंचाता हैः

• जब बिजली किसी वस्तु जैसे कि कार या धातु के खंभे से टकराती है, तो उस टत कर रहा व्यक्ति इसकी चपेट में आ जाता है।

• जब बिजली छिटक जाए या किसी वस्तु से टकरा जाती है, तब हादसा का शिकार हो सकता है।

• जब बिजली पीड़ित के पास जमीन से टकराती है तब ग्राउंड करंट जमीन से होकर पीड़ित को स्ट्राइक करता है।

इन्हें होता है ज्यादा खतराः

वज्रपात या आकाशीय बिजली का खतरा उन लोगों पर ज्यादा होता है, जो लोग खेत खलिहान में काम कर रहे होते हैं।

इसके अलावा जो पेड़ के नीचे छुपे होते हैं या फिर नदी तालाब और जलाश्य में मौजूद होते हैं, उन्हें ज्यादा खतरा होता है।

झारखंड में हर साल 360 लोगों की जाती है जान

झारखंड में हर साल 350 लोगों की मौत वज्रपात से हो जाती है। जबकि यहां हर साल करीब 4.5 लाख बार थंडरिंग और वज्रपात होता है।

इससे प्रभावित लोगों में सबसे ज्यादा 68 फीसदी आदिवासी हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक झारखंड के ग्रामीण इलाकों में जनजातीय समुदाय के लोग सबसे अधिक हैं।

वो प्रकृति के ज्यादा करीब रहते हैं, इसलिए बारिश के मौसम में वज्रपात की चपेट में वे ज्यादा आते हैं।

देश में हर साल 36 लाख बार गिरती है बिजली

पूरे देश में हर साल करीब 36 लाख से अधिक बार बिजली गिरती है। इसमें सबसे अधिक बिजली मध्य प्रदेश में गिरती है।

यहां करीब 6.5 लाख बार बिजली गिरती है। दूसरे स्थान पर छत्तीसगढ है। झारखंड बिजली गिरने वाले राज्यों में पांचवें स्थान पर है।

दिल्ली में सबसे कम बिजली गिरती है। झारखंड में निचले स्तर से बादल से बिजली गिरती है। इस कारण झारखंड में वज्रपात से जान माल का ज्यादा नुकसान होता है।

वज्रपात को लेकर कोई ठोस योजना नहीः

झारखंड में वज्रपात रोकने के लिए कोई ठोस योजना अब तक नहीं बन सकी है। मौसम विज्ञान विभाग भविष्यवाणी तो कर रहा है, लेकिन यह पंचायत स्तर या गांव स्तर पर नहीं पहुंच पा रहा है।

यहां संस्थानों में करीब 10 साल पहले तड़ित चालक लगे थे। उसकी स्थिति दुरुस्त नहीं है।

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