झारखंड के रांची स्थित कांके की 33 एकड़ जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जो अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। यह जमीन विधायकों और पूर्व विधायकों के आवास के लिए स्वावलंबन सहकारी समिति को दी गई थी, लेकिन जांच में सामने आया कि यह जमीन पहले से ही 1970-71 में भूमिहीन परिवारों के नाम बंदोबस्त थी। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने आरोप लगाया कि भाजपा शासनकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के दबाव में अधिकारियों ने इस जमीन को गलत तरीके से हस्तांतरित कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, जमीन का एक हिस्सा रिंग रोड, मसना और डोभा में उपयोग हो चुका है, जबकि शेष जमीन पर आज भी ग्रामीण खेती कर रहे हैं। इस मुद्दे पर सदन में मंत्री और भाजपा विधायक सीपी सिंह के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। फिलहाल सरकार वैकल्पिक जमीन तलाशने की बात कर रही है, जबकि यह मामला झारखंड की जमीन व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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