रांची। खनन घोटाले के आरोपी नंद किशोर पटोदिया ने सरेंडर कर दिया है। उन्होंने रांची सीबीआई की विशेष कोर्ट में शनिवार को सरेंडर किया। यह मामला उषा मार्टिन माइनिंग घोटाला से जुड़ा है।
सरेंडर के बाद मिली बेलः
सरेंडर के बाद अदालत ने उन्हें सशर्त बेल दे दी। कोर्ट ने उन्हें 25-25 हजार के दो निजी मुचलके और पासपोर्ट जमा करने की शर्त पर जमानत की सुविधा प्रदान की है।
उनपर वर्ष 2005 में उषा मार्टिन को माइंस आवंटन में भ्रष्टाचार का आरोप है। वर्ष 2005 में उषा मार्टिन कंपनी को पश्चिमी सिंहभूम जिले के घाटकुरी में एक लौह अयस्क खदान आवंटित की गई थी। इसमें कथित रुप से भ्रष्टाचार हुआ था।
आईएएस अरुण कुमार सिंह उस वक्त खनन विभाग के सचिव थे और इंद्रदेव पासवान खनन निदेशक थे।CBI के मुताबिक, इस घोटाले में नंद किशोर पटोदिया की भी भूमिका थी।
2016 में दर्ज हुई थी प्राथमिकीः
सीबीआई की दिल्ली इकाई ने कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत में 220/2016 में एक प्राथमिकी दर्ज करायी थी।
प्राथमिकी में उषा मार्टिन के प्रमोटरों और खनन विभाग के अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था।
प्राथमिकी में कहा गया था कि खदान के आवंटन के लिए केंद्र सरकार को जो सिफारिश भेजी गई थी, उसमें राज्य सरकार की तरफ से अधिकारियों ने कथित रूप से उषा मार्टिन के पक्ष में पक्षपात किया था।
नियमों का उल्लंघन किया कंपनी नेः
कंपनी ने कथित तौर पर वादा किया था कि वह हाट गम्हरिया में स्थित अपने इस्पात संयंत्र में लौह अयस्क का उपयोग करेगी।
कंपनी ने राज्य सरकार को एक अंडरटेकिंग भी दिया था। हालांकि सीबीआई ने आरोप लगाया कि कंपनी बाद में यह कहते हुए इस बात से मुकर गई कि कैबिनेट नोट में इसका कोई विशेष जिक्र नहीं था।
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