झारखंड के कॉलेजों को ग्रांट मिलना हुआ मुश्किल

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UGC ने अनुदान की शर्तों में किया बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। विश्वाविद्यालयों और कॉलेजों के लिए यूजीसी अनुदान पाना अब आसान नहीं होगा। यूजीसी ने अनुदान की शर्तों में बड़ा बदलाव किया है। इसका झारखंड के विश्विवद्यालयों और कॉलेजों पर खासा असर पड़नेवाला है।

यूजीसी के नये वित्तीय सहयोग नियमों के मुताबिक अब कॉलेज और विश्वविद्यालयों को यूजीसी का अनुदान तभी मिल सकेगा, जब शिक्षकों के कम से कम 75% पद भरे होंगे। साथ ही, कॉलेज और विश्वविद्यालय अब छात्रों से मनचाही फीस नहीं वसूल सकेंगे।

छात्रों से वे उतनी ही फीस ले सकेंगे, जितनी केंद्र, राज्य विश्वविद्यालय स्तर पर पहले से निर्धारित है। नये नियम के तहत कॉलेज और विश्वविद्यालयों को नैक, एनबीए और एनआइआरएफ से रैंकिग हासिल करना भी जरूरी होगा। इन शर्तों को पूरा किये  बिना यूजीसी से अनुदान नहीं मिलेगा।

ये भी बदलाव अहम

अनुदान लेने के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालयों को राज्यों और केंद्र की आरक्षण नीतियों का पालन करना जरूरी होगा। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों को अनुदान के लिए तीन या तीन से अधिक कार्यक्रमों को बतौर प्रोजेक्ट दिखाना होगा।

इन कार्यक्रमों में कम से कम 60 फीसदी कार्यक्रम का मान्यता प्राप्त होना जरूरी है। इसी तरह संस्थानों को शिक्षकों को वही वेतनमान देना होगा राज्य या यूजीसी ने पहले से तय किये हैं। नामांकन और अन्य सुविधाओं के मामले में आरक्षण नीतियों का पालन जरूरी है।

रैंकिंग अनिवार्य

अनुदान के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालयों को एनआइआरएफ की रैंकिंग में शामिल होना जरूरी होगा। अगर किसी संस्थान ने रैंकिंग में शामिल होने के लिए पांच भागीदारी की है तो उसे कम से कम तीन बार रैंकिंग लिस्ट में दर्ज होना होगा।

वहीं रैंकिंग कार्यक्रम में सिर्फ तीन बार भाग लिया है तो दो बार संस्थान को रैंकिंग लिस्ट में दर्ज होना होगा। इसके बाद ही यूजीसी ग्रांट मिल सकेगा।

झारखंड पर असर

यूजीसी की इन शर्तों का झारखंड पर खासा असर पड़नेवाला है। झारखंड के सभी विश्वविद्यालय और कालेजों में शिक्षकों के लगभग 50 फीसदी पद रिक्त हैं। इसके अलावा यहां के ज्यादातर विश्वविद्यालय और कॉलेजों की रैंकिंग नहीं हो सकी है।

इन दोनों ही मामलों में झारखंड के कॉलेज पीछ हैं। इसके कारण यहां के विश्वविद्यालय और कॉलेजों को यूजीसी ग्रांट से वंचित होना पड़ सकता है।

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