Stock Market: भारी गिरावट के साथ खुला शेयर बाजार, सेंसेक्स 1800 अंक टूटा, निफ्टी भी 23,900 के पार

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मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के चलते बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली।

प्री-ओपनिंग सत्र में ही सेंसेक्स 2300 अंकों से अधिक तक फिसल गया। बाजार खुलने के बाद 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1857.34 अंक यानी 2.35 प्रतिशत गिरकर 77,061.56 पर आ गया। वहीं निफ्टी 50 इंडेक्स 519.50 अंक यानी 2.12 प्रतिशत टूटकर 23,930.95 पर कारोबार करता दिखा। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया भी कमजोर पड़ा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 43 पैसे गिरकर 92.25 के स्तर पर पहुंच गया।कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। बाजार में आशंका है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जो वैश्विक तेल व्यापार का बेहद अहम मार्ग माना जाता है। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड की कीमत जुलाई 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई। ब्रेंट क्रूड करीब 20 प्रतिशत उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। बीते सप्ताह में ही इसमें लगभग 28 प्रतिशत की तेज रैली दर्ज की गई थी और यह 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

सोना-चांदी में भी उतार-चढ़ाव

एशियाई कारोबार के दौरान कीमती धातुओं में भी भारी अस्थिरता देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड करीब 2.12 प्रतिशत गिरकर 5,049 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि स्पॉट सिल्वर 3.51 प्रतिशत टूटकर 81.34 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। निवेशकों द्वारा पोजिशन एडजस्ट करने के कारण दोनों धातुओं में लगभग 3.5 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई।

एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली

तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक जोखिम बढ़ने के कारण एशियाई शेयर बाजारों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 6.22 प्रतिशत गिरकर 53,000 के नीचे आ गया। टॉपिक्स इंडेक्स 5.27 प्रतिशत लुढ़क गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6.68 प्रतिशत तक टूट गया। तेज अस्थिरता के चलते दक्षिण कोरिया में कोस्पी 200 फ्यूचर्स की ट्रेडिंग कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी।

आगे इन कारकों पर रहेगी नजर

विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक निवेशकों के जोखिम लेने के रुख पर निर्भर करेगी। यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर वैश्विक महंगाई, ब्याज दरों और शेयर बाजारों पर और गहरा पड़ सकता है।

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