पेरिस, एजेंसियां। पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत ने पहला मेडल जीत लिया है। भारत की स्टार निशानेबाज मनु भाकर ने भारत के लिए 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
22 साल की मनु भाकर शूटिंग में भारत के लिए ओलंपिक मेडल जीतने वाली पहली महिला एथलीट बनी हैं। इसी के साथ अब भारत ने पेरिस ओलंपिक में अपने मेडल का खाता खोल लिया है।
इस जीत के साथ ही पूरे देश में आज हर जुबान मनु भाकर का ही नाम है। लोग जानना चाहते हैं कि कौन हैं यह भारतीय एथलीट जिन्होंने देश को पेरिस ओलंपिक में पहला मेडल जिताया।
आइये मनु भाकर के बारे में विस्तार से जानते हैं।
कौन हैं मनु भाकर?
प्रसिद्ध भारतीय खेल निशानेबाज मनु भाकर ने पिस्टल शूटिंग में अपने असाधारण कौशल से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम बनाया है।
हरियाणा के झज्जर की रहने वाली मनु का जन्म 18 फरवरी, 2002 को हुआ था और वह निशानेबाजी में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे होनहार युवा एथलीटों में से एक बन गई हैं।
मनु ने निशानेबाजी में आने से पहले मुक्केबाजी, टेनिस और स्केटिंग जैसे खेलों में गहरी रुचि दिखाई। उनका इंटरनेशनल डेब्यू 2017 में हुआ। उन्होंने अपने प्रभावशाली प्रदर्शन के साथ जल्दी ही अपनी पहचान बना ली।
युवा ओलंपिक में जीता था गोल्ड मेडल
ब्यूनस आयर्स में 2018 के युवा ओलंपिक खेलों में मनु ने 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था, जिससे वह युवा ओलंपिक में यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय निशानेबाज बन गईं थी।
उन्होंने आईएसएसएफ विश्व कप प्रतियोगिताओं में कई पदक भी जीते हैं, जिनमें व्यक्तिगत और मिक्स टीम प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक शामिल हैं।
16 साल की उम्र में जीता पहला स्वर्ण पदक
मनु का पहला स्वर्ण पदक 16 साल की उम्र में आया जब उन्होंने ग्वाडलजारा में 2018 आईएसएसएफ विश्व कप में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में जीत हासिल की।
ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में उनकी सफलता जारी रही, जहां उन्होंने उसी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल किया। इससे ग्लोबल स्टेज पर एक शीर्ष निशानेबाज के रूप में उनकी स्थिति मजबूत हुई।
साथी भारतीय निशानेबाज अभिषेक वर्मा के साथ मनु की साझेदारी जकार्ता में 2018 एशियाई खेलों में अच्छी साबित हुई, जहां उन्होंने मिक्स टीम 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था।
टोक्यो 2020 ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। हालांकि वह पदक हासिल करने से चूक गईं थी।
महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा के दौरान उनकी पिस्टल में तकनीकी खराबी आ गई थी। भारतीय खेलों में उनके योगदान को 2020 में प्रतिष्ठित अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
टोक्यो ओलंपिक के बाद डिप्रेशन में थी मनु, गीता पढ़कर संभली
झज्जर के गांव गोरिया की बेटी मनु भाकर का पेरिस तक का सफर सहज नहीं रहा। उनका मार्ग कठिनाइयों और चुनौतियों से भरा था। खासकर पिछले ओलिंपिक, टोक्यो 2020, में।
टोक्यो ओलंपिक के दौरान, मनु की पिस्टल में तकनीकी गड़बड़ी के कारण उनका प्रदर्शन गड़बड़ा गया था। मनु के पिता, रामकिशन भाकर के अनुसार “टोक्यो ओलिंपिक में मनु ने नहीं, उसकी पिस्टल ने धोखा दिया था। दूसरी सीरीज के दौरान इलेक्ट्रॉनिक ट्रिगर में सर्किट की खराबी आ गई थी। यह एक कठिन समय था, क्योंकि तकनीकी गड़बड़ी के कारण लगभग 22 मिनट तक शूटिंग नहीं हो पाई।”
टोक्यो में पदक से चूकने के बाद, मनु डिप्रेशन के दौर से गुजरीं और घर में शूटिंग छोड़ने तक की बातें होने लगीं। इस कठिन दौर में, उन्होंने गीता का अध्ययन किया और योग के माध्यम से तनाव को दूर करने की कोशिश की।
मनु भाकर की इस प्रेरणादायक यात्रा ने न केवल भारतीय खेल प्रेमियों को गर्वित किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और आत्म-विश्वास से बड़ी से बड़ी चुनौतियों को पार किया जा सकता है।
इसे भी पढ़ें
पेरिस ओलंपिक: भारत को पहला मेडल, मनु भाकर ने 10 मीटर एयर पिस्टल में ब्रॉन्ज जीता









