विश्वकप फाइनल में एक बार फिर साउथ अफ्रीका हुआ चोक [South Africa once again choked in the World Cup final]

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क्लूजनर से लेकर क्लासेन तक, नहीं मिटा पाये जीती बाजी हारने का कलंक

नई दिल्ली, एजेंसियां। टीम इंडिया टी-20 का बादशाह बन गई है। टीम इंडिया ने फाइनल में साउथ अफ्रीका को हराया।

इसके साथ ही साउथ अफ्रीका एक बार फिर चोक हो गया यानी उनके चोकर्स होने का तमगा कायम है। मैच के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया, जब सबको टीम इंडिया का हार दिखने लगी थी।

पर यहीं से सूर्य कुमार यादव के एक कैच ने मैच का पासा ही पलट दिया और दिग्गज अफ्रीकी बल्लेबाज मिलर के आउट होते ही पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।

प्रोटियाज टीम एक बार फिर चोकर्स के तमगे से निजात नहीं पा सकी। साउथ अफ्रीकन फैंस के मस्तिष्क में क्लासेन से लेकर क्लूजनर तक के दृश्य ताजा हो गए, जब टीम आखिरी के ओवर में लगभग जीती हुई बाजी हार गई।

30 गेंद में 30 रन नहीं बना सकी साउथ अफ्रीकन टीम

टी20 वर्ल्ड कप 2024 के इस फाइनल मुकाबले में साउथ अफ्रीकन टीम को आखिरी के 30 गेंदों पर 30 रन की जरूरत थी और 6 विकेट हाथ में थे।

हेनरिक क्लासेन ताबड़तोड़ बल्लेबाजी कर रहे थे। 15वां ओवर डालने आए अक्षर पटेल की तो उन्होंने जमकर कुटाई कर दी।

उस एक ओवर में प्रोटियाज टीम ने 24 रन हासिल कर लिए। इस विशाल ओवर के बाद ऐसा लग रहा था कि दक्षिणी अफ्रीकी टीम विश्व विजेता के सिंहासन से बस कुछ ही कदम दूर है।

टीम इंडिया पर मंडरा रहा था हार का खतरा

भारतीय फैंस से भरे बारबाडोस के मैदान में बिल्कुल सन्नाटा छा गया। सभी को यह डर सताने लगा कि टी-20 वर्ल्ड कप एक बार फिर अपने नाम करने का सपना चकना चूर हो जाएगा।

हालांकि ये दक्षिण अफ्रीफी टीम थी, जो आखिरी के ओवरों के दबाव में ढहने के लिए बदनाम है। इसी कारण इसे चोकर्स का तमगा भी दिया जाता है और विश्व कप फाइनल में फिर एक बार यह टीम चोक कर गई।

मैच के 16वें ओवर में टीवी पर दिखाई जा रहे आंकड़ों में 92% लोगों को प्रोटियाज की जीत का यकीन था।

हालांकि फिर हार्दिक पंड्या 17वां डालने आए और पहली ही गेंद पर क्लासेन को चलता कर दिया।

इस एक विकेट ने टीम इंडिया के साथ-साथ सभी फैंस में एक नया जोश भर दिया और यहीं से दक्षिण अफ्रीकी टीम दवाब में ढहती चली गई। एक वक्त जीत की दहलीज से महज कुछ दूर प्रोटियाज टीम 7 रन से यह मैच हार गई।

वर्ल्ड कप में रहा खराब रिकॉर्ड

दक्षिण अफ्रीका की टीम हमेशा से ही मजबूत मानी गई है, लेकिन विश्व कप जैसे खिताबी मुकाबलों में इस टीम के धराशायी होने का बुरा रिकॉर्ड रहा है।

इसकी एक बानगी अब तक खेले गए कुल 18 वनडे और टी-20 वर्ल्ड कप में अफ्रीकी टीम पहली बार फाइनल मुकाबले तक पहुंच पाई।

वहीं 7 बार उसे सेमीफाइनल में शिकस्त झेलना पड़ा, जबकि 10 बार तो वह उससे पहले ही बाहर हो गई थी।

क्लूजनर का रन आउट कभी भूल नहीं पाएंगे क्रिकेट प्रशंसक

प्रोटियाज़ टीम ऐसे क्लोज मैच में हारने के लिए बदनाम है। इसमें 1999 के वनडे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले में मिली हार तो शायद ही कोई क्रिकेट प्रशंसक भूला होगा।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस मैच में साउथ अफ्रीकन टीम को जीत के लिए लास्ट ओवर में 9 रनों की जरूरत थी और उसका आखिरी विकेट मैदान के क्रीज पर था। पिच पर घातक ऑल राउंडर लांस क्लूजनर के साथ तेज गेंदबाद एलन डोनाल्ड थे।

क्लूजनर ने आखिरी ओवर की पहली 2 गेंदों पर 2 चौके लगाकर स्कोर बराबर कर दिया। अब प्रोटियाज़ टीम को जीत के लिए 4 बॉल पर महज 1 रन चाहिए थे।

दक्षिण अफ्रीकी फैंस खूशी से झूम रहे थे। हालांकि फिर कुछ ऐसा हुआ जिस पर किसी के लिए भरोसा करना मुश्किल होगा।

चौथी गेंद पर क्लूजनर ने तेजी से रन चुराने की कोशिश की, लेकिन डोनाल्ड का उसमें साथ नहीं मिल सका और वह रन आउट हो गए।

इस तरह दक्षिण अफ्रीकी टीम आल आउट हो गयी और जीता हुआ मैच टाइ हो गया था। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने फाइनल मुकाबले में जगह बना ली और पाकिस्तान को हराकर वह खिताब अपने नाम कर लिया।

1992 के वर्ल्ड कप में डीआरएस ने किया था बाहर

इससे पहले वनडे वर्ल्ड कप 1992 में अफ्रीकी टीम पूरे लय में खेल रही थी। न्यूजीलैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में टीम जीत की ओर अग्रसर थी।

अगले 13 बॉल में उसे जीत के लिए 22 रन की जरूरत थी। परंतु इसी समय बारिश के काऱण खेल रूक गया और जब आधे घंटे बाद खेल शुरू हुआ, तो डीआरएस मेथड के तहत टीम को 1 बॉल में 22 रन बनाने की चुनौती मिली, जो असंभव थी और अफ्रीका हार कर बाहर हो गया।

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