Jaspreet Bumrah:
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह पर पूर्व क्रिकेटर और चयन समिति के पूर्व अध्यक्ष संदीप पाटिल ने बड़ा हमला किया है। इंग्लैंड दौरे पर वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत बुमराह केवल 5 में से 3 टेस्ट मैच ही खेल पाए थे, जबकि बाकी 2 महत्वपूर्ण मैच जिसमें भारत ने जीत हासिल की, वह बाहर थे। संदीप पाटिल ने बीसीसीआई की वर्कलोड नीति पर सवाल उठाए और कहा कि यह तरीका सही नहीं है।
विश्व कप विजेता पाटिल ने कहा
1983 के विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे पाटिल ने कहा कि उनके जमाने में ऐसे किसी प्रबंधन की बात नहीं होती थी। जब खिलाड़ी चोटिल होते थे तब भी मैदान में उतरते थे और देश के लिए पूरी मेहनत करते थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने सुनील गावस्कर को पांचों दिन लगातार बैटिंग करते देखा, जबकि कपिल देव लंबे समय तक बिना ब्रेक के गेंदबाजी करते थे। कपिल देव का करियर 16 साल से अधिक लंबा रहा और उन्होंने कभी चोट के बावजूद आराम नहीं मांगा। पाटिल ने खुद के अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि 1981 में ऑस्ट्रेलिया में सिर पर चोट लगने के बाद भी उन्होंने मैच खेलना जारी रखा था।
बीसीसीआई और चयनकर्ताओं पर साधा निशाना
संदीप पाटिल ने बीसीसीआई और चयनकर्ताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि अब फिजियो ही चयन प्रक्रिया में ज्यादा प्रभावशाली हो गए हैं, जबकि कोच, कप्तान और सिलेक्टर्स की भूमिका कम होती जा रही है। उन्होंने कहा, “देश के लिए खेलना एक सम्मान होता है, खिलाड़ी अपने वतन के लिए योद्धा की तरह मैदान में उतरते हैं। हमारे दौर में रिहैब प्रोग्राम नहीं होते थे, हम चोट लगने के बाद भी खेलते थे और देश के लिए खेलने में खुशी महसूस करते थे, कोई ड्रामा नहीं होता था।”
बुमराह के लिए यह आलोचना
बुमराह के लिए यह आलोचना इसलिए भी तेज हुई क्योंकि इंग्लैंड में बुमराह ने तीन टेस्ट ही खेले और टीम ने बिना उनके दो मैचों में जीत हासिल की। इस वजह से संदीप पाटिल का मानना है कि प्रमुख खिलाड़ियों को इस तरह आराम देना टीम के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्कलोड मैनेजमेंट के नाम पर खिलाड़ियों को ज्यादा आराम देने का चलन खेल भावना के खिलाफ है और इससे टीम की परफॉर्मेंस भी प्रभावित हो सकती है।
इस मामले में बीसीसीआई और टीम मैनेजमेंट की नीति पर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या वाकई वर्कलोड मैनेजमेंट से टीम को फायदा होता है या इससे खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता और टीम की ताकत पर असर पड़ता है।
पूर्व क्रिकेटर और चयन समिति के पूर्व अध्यक्ष संदीप पाटिल ने जसप्रीत बुमराह पर बड़ा हमला किया है। इंग्लैंड दौरे पर बुमराह को वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत 5 में से केवल 3 टेस्ट मैच खेलने दिए गए, जबकि टीम ने बिना उनके दो मैच जीते। पाटिल ने कहा कि उनके जमाने में खिलाड़ी चोट लगने के बाद भी खेलते थे और देश के लिए पूरी मेहनत करते थे। उन्होंने सुनील गावस्कर और कपिल देव के उदाहरण देते हुए बताया कि वे बिना ब्रेक के खेलते थे और कभी आराम की मांग नहीं करते थे।
संदीप पाटिल ने कहा कि अब फिजियो का निर्णय ज्यादा अहम हो गया है और सिलेक्टर्स की भूमिका कम हो गई है, जो गलत है। उन्होंने वर्कलोड मैनेजमेंट पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता और टीम की ताकत को कमजोर करता है। उनका मानना है कि देश के लिए खेलना खुशी की बात होती है, न कि कोई ड्रामा।
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