Sheetal Devi:
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत की पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने इतिहास रच दिया है। जन्म से ही दोनों हाथ न होने के बावजूद, उन्होंने अपने पैरों से निशाना साधते हुए ऐसा कारनामा किया है जो अब तक किसी ने नहीं किया था। शीतल अब भारतीय एबल-बॉडी जूनियर तीरंदाजी टीम में शामिल होने वाली पहली पैरा एथलीट बन गई हैं। वह जेद्दा में होने वाले एशिया कप स्टेज-3 टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।18 वर्षीय शीतल देवी ने हरियाणा के सोनीपत में हुए नेशनल सिलेक्शन ट्रायल्स में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने 60 से अधिक एबल-बॉडी तीरंदाजों के बीच मुकाबला करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया। क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने 703 अंक (352+351) जुटाए, जो शीर्ष खिलाड़ी तेजल साल्वे के बराबर था।
शीतल कटरा की कहानी:
शीतल कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रशिक्षण लेती हैं। इससे पहले वह पैरा वर्ल्ड आर्चरी चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर दुनिया की पहली बिना हाथों वाली महिला विश्व चैंपियन बनी थीं। पेरिस पैरालंपिक में उन्होंने मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता था।कोच गौरव शर्मा ने वर्ल्ड आर्चरी के नियमों में बदलाव के बाद शीतल की तकनीक को दोबारा गढ़ा। उन्हें एड़ी के बजाय पैर के अगले हिस्से से तीर चलाना सीखना पड़ा, जिसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। गौरव ने कहा, “शीतल ने कभी हार नहीं मानी, भले ही उसके पैरों में दर्द होता था।”
शीतल ने कहा:
शीतल ने कहा, “जब मैंने खेलना शुरू किया था, मेरा सपना था सक्षम तीरंदाजों के साथ मुकाबला करना। आज वह सपना सच हो गया है।”
तुर्की की पैरालंपिक चैंपियन ओज्नुर क्यूर गिर्दी से प्रेरणा लेने वाली शीतल अब भारत की नई प्रेरणास्रोत बन गई हैं। उनके इस साहसिक कदम ने साबित कर दिया है कि सीमाएं केवल सोच में होती हैं, हौसले में नहीं।
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