Vasant Panchami
नई दिल्ली, एजेंसियां। हर वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।बसंत पंचमी को ‘श्री पंचमी’ या ‘ज्ञान पंचमी’ के नाम से भी जाना जाता ह। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में माघ शुक्ल पंचमी तिथि 23 जनवरी को रात 02:28 बजे प्रारंभ होकर 24 जनवरी को रात 01:46 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार वसंत पंचमी 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन मां सरस्वती की पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 6:57 बजे से दोपहर 12:21 बजे तक रहेगा।
वसंत पंचमी की पौराणिक कथा
सृष्टि की रचना के समय ब्रह्माजी ने महसूस किया कि जीवों की सर्जन के बाद भी चारों ओर मौन छाया रहता है। उन्होंने विष्णुजी से अनुमति लेकर अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे पृथ्वी पर एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई। छह भुजाओं वाली इस शक्ति रूप स्त्री के एक हाथ में पुस्तक, दूसरे में पुष्प, तीसरे और चौथे हाथ में कमंडल और बाकी के दो हाथों में वीणा और माला थी। ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, चारों ओर ज्ञान और उत्सव का वातावरण फैल गया, वेदमंत्र गूंज उठे। ऋषियों की अंतःचेतना उन स्वरों को सुनकर झूम उठी। ज्ञान की जो लहरियां व्याप्त हुईं, उन्हें ऋषिचेतना ने संचित कर लिया।तब से इसी दिन को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है।
मां सरस्वती की आराधना का महत्व
वसंत पंचमी को ज्ञान, विद्या, कला और वाणी की देवी मां सरस्वती को समर्पित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां सरस्वती का पूजन करने से बुद्धि तेज होती है, वाणी में मधुरता आती है और स्मरण शक्ति बढ़ती है। शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी, शिक्षक, कलाकार, संगीतकार और साहित्य से जुड़े लोग विशेष रूप से सरस्वती पूजा करते हैं। छात्र अपनी पुस्तकों, कॉपियों और कलम की पूजा कर विद्या में सफलता की कामना करते हैं।
पीले रंग का विशेष महत्व
वसंत पंचमी पर पीले रंग के वस्त्र पहनने और पीले भोजन का विशेष महत्व है। पीला रंग वसंत ऋतु, सरसों के फूलों, ऊर्जा, समृद्धि और आशा का प्रतीक माना जाता है। यह रंग सात्विकता, शुद्धता और सकारात्मकता को दर्शाता है। मान्यता है कि पीला रंग मन को प्रसन्न करता है, दिमाग को सक्रिय करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है। इसी कारण इस दिन पीले वस्त्र, केसरिया भात, हलवा, खिचड़ी और बूंदी जैसे पीले व्यंजन बनाए जाते हैं।
सफेद रंग क्यों है खास?
पीले के साथ-साथ बसंत पंचमी पर सफेद रंग का भी विशेष महत्व होता है। सफेद रंग शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक माना जाता है। यह मन को शांत रखता है और सच्चे ज्ञान की ओर प्रेरित करता है। मान्यता है कि सफेद रंग पहनने और सफेद भोग अर्पित करने से मां सरस्वती विशेष रूप से प्रसन्न होती हैं।
मां सरस्वती पूजा की विधि
मााँ सरस्वती पूजा करते समय सबसे पहले सरस्वती माता की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखना चाहिए. इसके बाद कलश स्थापित करके गणेश जी तथा नवग्रह की विधिवत पूजा करनी चाहिए. इसके बाद माता सरस्वती की पूजा करें. सरस्वती माता की पूजा करते समय उन्हें सबसे पहले आचमन एवं स्नान कराएं. इसके बाद माता को फूल एवं माला चढ़ाएं. सरस्वती माता को सिन्दुर एवं अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए। वसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित किया जाता है।
बसंत पंचमी का भोग
इस दिन पीले रंग के व्यंजन जैसे केसरिया भात, हलवा, खिचड़ी और सरसों का साग बनाए जाते हैं। वहीं सफेद भोग में मखाने की खीर, बर्फी आदि शामिल होती हैं। ये भोजन न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि बदलते मौसम में सेहत के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं।
वसंत पंचमी पर इन मंत्रों का करें जाप
- या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः॥
- ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयंकरी. वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा॥
- ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥
- ॐ वाग्देव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि. तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
देवी सरस्वती श्वेत(सफेद) वस्त्र धारण करती हैं अत: उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं. सरस्वती पूजन के अवसर पर माता सरस्वती को पीले रंग का फल चढ़ाए। प्रसाद के रूप में मौसमी फलों के अलावा बूंदिया अर्पित करना चाहिए. इस दिन सरस्वती माता को मालपुए एवं खीर का भी भोग लगाया जाता है।

