Kharmas Surya Puja
नई दिल्ली, एजेंसियां। खरमास 2025 की शुरुआत 16 दिसंबर 2025 से हो चुकी है और यह 14 जनवरी 2026, मकर संक्रांति तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन सूर्यदेव की आराधना के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान सूर्य उपासना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सूर्य चालीसा से बढ़ता है आत्मबल
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, खरमास में सूर्य चालीसा का नियमित पाठ करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। इससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है, समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। सूर्य पिता, प्रशासन, प्रतिष्ठा और स्वास्थ्य के कारक ग्रह माने जाते हैं, इसलिए उनकी कृपा से करियर और पारिवारिक जीवन में भी स्थिरता आती है।
खरमास में सूर्य मंत्र जाप का फल
खरमास के दौरान प्रतिदिन प्रातः स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर उनके मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। ‘ॐ सूर्याय नमः’, ‘ॐ आदित्याय नमः’ और ‘ॐ भानवे नमः’ जैसे मंत्रों के जाप से मानसिक बल, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित होती है। मान्यता है कि 12 सूर्य नामों का श्रद्धा से जाप करने से दुख, दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
मान-सम्मान और सफलता का मार्ग
धार्मिक विश्वासों के अनुसार, खरमास में सूर्यदेव की भक्ति करने वाले साधक को सामाजिक प्रतिष्ठा, उच्च पद और सफलता का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही पिता से संबंध मजबूत होते हैं और स्वास्थ्य में भी सुधार आता है। यही कारण है कि खरमास को सूर्य आराधना का विशेष पर्व माना गया है।
अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित है।







