Phalgun festival
नई दिल्ली, एजेंसियां। हिंदू पंचांग में फाल्गुन मास को केवल एक सामान्य महीना नहीं बल्कि आनंद, उल्लास और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक माना गया है। वर्ष 2026 में यह मास 2 फरवरी से शुरू हुआ, जो माघ पूर्णिमा के बाद प्रारंभ हुआ। शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन मास वह समय है जब प्रकृति के साथ-साथ मन और आत्मा भी नए जीवन का अनुभव करती हैं। सर्दियों के खत्म होने और वसंत ऋतु के आगमन के साथ यह महीना मन में ताजगी, ऊर्जा और नई सकारात्मकता भर देता है।
फाल्गुन मास का धार्मिक और सामाजिक महत्व
फाल्गुन मास का धार्मिक और सामाजिक महत्व बहुत गहरा है। यह मास भक्ति, प्रेम और आंतरिक शांति का संदेश देता है। धार्मिक दृष्टि से इस मास में महाशिवरात्रि और होली जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं, जो केवल बाहरी उल्लास ही नहीं बल्कि आंतरिक शुद्धि और मानसिक आनंद का माध्यम भी बनते हैं। रंगों की उमंग, भक्ति का भाव और मन का उल्लास इस मास की खासियत हैं।
शास्त्रों के अनुसार
शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन मास में प्रकृति अपने सबसे कोमल और सुंदर रूप में प्रकट होती है। मौसम में हल्की नरमी और सुहानी हवाएं चलने लगती हैं, जिसका सकारात्मक असर मानव मन पर पड़ता है। पद्म पुराण में उल्लेख है कि इस मास में देवता भी आनंद रूप में पृथ्वी पर विचरण करते हैं। ठंड के कम होने से शरीर और मन में हल्कापन महसूस होता है, जिससे व्यक्ति अधिक प्रसन्न और सकारात्मक रहता है।
वसंत को ऋतुओं का राजा क्यों कहा जाता?
फाल्गुन मास का वसंत ऋतु से गहरा संबंध है। वसंत को ऋतुओं का राजा कहा गया है और फाल्गुन को इसका स्वागतकर्ता माना जाता है। इस समय खिलते फूल, पेड़ों की नई पत्तियां और वातावरण में बिखरी सुगंध मन को आनंदित कर देती हैं। स्कंद पुराण के अनुसार वसंत ऋतु में की गई भक्ति और साधना मन को जल्दी स्थिर करती है और व्यक्ति अधिक सहजता से प्रेम और आनंद का अनुभव करता है।
फाल्गुन मास में क्या है खास?
इसके अलावा, फाल्गुन मास में साधना और पुण्य कर्म करने का विशेष महत्व है। इस समय किया गया जप, ध्यान और दान जल्दी फलदायक होता है और व्यक्ति मानसिक और आध्यात्मिक रूप से संतुलित रहता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस मास में किए गए हर पुण्य कर्म का फल आनंद के रूप में लौटता है। यही कारण है कि फाल्गुन मास को केवल उत्सव का ही नहीं बल्कि आत्मिक जागरण और आनंद का महीना भी माना गया है।
फाल्गुन मास 2026 न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक शांति, सकारात्मकता और जीवन में नई ऊर्जा का प्रतीक भी बनता है।
