Mauni Amavasya: कब है मौनी अमावस्या 18 या 19 जनवरी? जानें साल की पहली बड़ी अमावस्या की तिथि और महत्व

3 Min Read

Mauni Amavasya

नई दिल्ली, एजेंसियां। साल 2026 की पहली और सबसे महत्वपूर्ण अमावस्या को लेकर लोगों के मन में असमंजस बना हुआ है। माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है, जो स्नान, दान, तर्पण, मौन व्रत और साधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। पंचांग के अनुसार तिथि को लेकर भ्रम है कि मौनी अमावस्या 18 जनवरी को है या 19 जनवरी को।

तिथि को लेकर क्यों है भ्रम

पंचांग के मुताबिक अमावस्या तिथि की शुरुआत 18 जनवरी 2026 की रात 12:03 बजे से हो रही है और यह 19 जनवरी रात 1:21 बजे तक रहेगी। इसी कारण कुछ लोग 19 जनवरी को भी अमावस्या मान रहे हैं। हालांकि उदयातिथि के अनुसार मौनी अमावस्या रविवार, 18 जनवरी 2026 को ही मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में पर्व-त्योहार प्रायः उदयातिथि के आधार पर ही मनाए जाते हैं।

क्यों खास है मौनी अमावस्या

मौनी अमावस्या को वर्षभर की अमावस्याओं में सबसे बड़ी अमावस्या माना जाता है। इस दिन मौन व्रत रखने की परंपरा है, जिससे मन और इंद्रियों पर संयम बना रहता है। मान्यता है कि मौन रहने से आत्मशुद्धि होती है और सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं।

स्नान, दान और तर्पण का महत्व

इस दिन गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान त्रिवेणी संगम में स्नान का विशेष महत्व है। साथ ही मौनी अमावस्या पितृ तर्पण के लिए भी श्रेष्ठ मानी जाती है। इस दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान किया जाता है।

दान, पूजा और ग्रह दोष शांति

माघ अमावस्या पर अन्न, वस्त्र, तिल, धन और भोजन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन किए गए उपायों से पितृ दोष, चंद्र दोष और मानसिक तनाव से राहत मिलने की मान्यता है। रविवार के संयोग के कारण सूर्य देव की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जा रही है। मौनी अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आत्म-निरीक्षण, संयम, साधना और परोपकार का संदेश देती है। इस दिन लिया गया संकल्प लंबे समय तक प्रभावी रहता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।

Share This Article
Exit mobile version