Mahashivratri 2026
रांची। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हर साल महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। इस बार यह पावन पर्व 15 फरवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का बेहद खास और बड़ा त्योहार है, जिसे शिव भक्त पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव पहली बार निराकार से साकार रूप में प्रकट हुए थे और इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यानी यह पर्व शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है।
300 साल बाद बन रहा है 8 योगों का महासंयोग
इस बार की महाशिवरात्रि इसलिए भी खास है कि करीब 300 साल बाद 8 शुभ योगों का संयोग बन रहा है। काशी के ज्योतिषियों के अनुसार, 15 फरवरी को सूर्य, बुध और शुक्र का त्रिग्रही योग बनेगा। इसके साथ ही श्रवण नक्षत्र, जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, भी इस दिन रहेगा। इतना ही नहीं, इस दिन व्यतिपात, वरियान, ध्रुव और राज योग का भी महासंयोग बन रहा है, जिससे इस महाशिवरात्रि का महत्व और बढ़ गया है।
महाशिवरात्रि का महत्व
पुराणों के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था, जो सृष्टि की रचना, पालन और संहार का प्रतीक है। इस रात शिव भक्त पूरी रात जागरण करते हैं और भजन-कीर्तन में लीन रहते हैं। महाशिवरात्रि सिर्फ धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम भी मानी जाती है। इस दिन ध्यान, साधना और मंत्र जप से मन को शांति और आत्मिक शक्ति मिलती है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
महाशिवरात्रि 2026: तिथि और पारण का समय
द्रिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी और 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। तिथि का प्रारंभ 15 फरवरी की शाम को होने के कारण महाशिवरात्रि का पर्व मुख्य रूप से 15 फरवरी को ही मनाया जाएगा। वहीं, व्रत का पारण 16 फरवरी की सुबह 6 बजकर 33 मिनट से दोपहर 3 बजकर 10 मिनट तक किया जा सकेगा।
4 प्रहर की पूजा का शुभ मुहूर्त
महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व होता है। पहला प्रहर 15 फरवरी को शाम 6:11 बजे से रात 9:23 बजे तक रहता है, दूसरा प्रहर रात 9:23 बजे से 16 फरवरी की रात 12:35 बजे तक होता है, तीसरा प्रहर रात 12:35 बजे से सुबह 3:47 बजे तक चलता है, और चौथा प्रहर सुबह 3:47 बजे से 6:59 बजे तक होता है। इनमें निशिथ काल को सबसे शुभ समय माना जाता है, जो 16 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक रहता है।
महाशिवरात्रि की पूजा विधि
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है, इसके बाद केसर मिला जल अर्पित किया जाता है। पूजा में भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। इस अवसर पर “ॐ नमः शिवाय” और “ॐ नमो भगवते रुद्राय” जैसे मंत्रों का जप विशेष फलदायी माना गया है। घी के दीपक से भगवान शिव और माता पार्वती की आरती की जाती है, साथ ही शिव पुराण का पाठ, रात्रि जागरण और दीप जलाकर रखना भी अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है।
