Nikay Chunav:
रांची। झारखंड में होने वाले नगर निकाय चुनाव की तस्वीर इस बार कुछ अलग दिखाई दे रही है। लंबे समय तक राजनीति को पुरुष-प्रधान क्षेत्र माना जाता रहा, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। इस बार नगर निकाय चुनाव के लिए हुए नामांकन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिलाएं अब सिर्फ मतदाता नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए भी तैयार हैं।नामांकन के अंतिम दिन तक जिस तरह महिलाओं ने बड़ी संख्या में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है , उससे स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है। अब वह समय पीछे छूटता जा रहा है जब महिलाएं निर्णय लेने के लिए पुरुषों पर निर्भर मानी जाती थीं।
जारी आंकड़ों के अनुसार
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पूरे झारखंड में महापौर और अध्यक्ष पद के लिए कुल 674 अभ्यर्थियों ने नामांकन दाखिल किया, जिनमें 283 महिलाएं शामिल हैं। वहीं वार्ड पार्षद पद के लिए 6,305 नामांकन हुए हैं, जिनमें 3,179 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
महिलाओं की बढ़ती भूमिका
ऐसा माना जा रहा है कि स्थानीय निकाय चुनाव में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। इससे न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर विकास से जुड़े मुद्दों को भी नई दृष्टि मिल सकती है। नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब स्क्रूटनी और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी । इसके बाद चुनाव मैदान में रहने वाले उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होगी।
हालांकि अंतिम सूची आने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी, लेकिन यह तय है कि इस बार नगर निकाय चुनाव में महिलाओं की भागीदारी निर्णायक भूमिका निभा सकती है। शहर की सरकार बनाने की प्रक्रिया में आधी आबादी की यह सक्रिय मौजूदगी सामाजिक और राजनीतिक बदलाव का संकेत मानी जा रही है।











