DGP appointment delay case
रांची। सुप्रीम कोर्ट में DGP नियुक्ति में देरी के मामले पर कल (12 फरवरी) को फिर सुनवाई होगी। जानकारी के मुताबिक इस मामले पर आज (बुधवार) को सुनवाई होनी थी, लेकिन अमिकस क्यूरी द्वारा एक दिन का समय लिए जाने के कारण अब इस पर गुरुवार को सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट जता चुका है नाराजगी
इससे पहले 5 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों द्वारा पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति में देरी करने और लंबे समय तक कार्यवाहक डीजीपी के सहारे पुलिस विभाग चलाने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे कई योग्य और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के करियर के साथ गंभीर अन्याय होता है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने इस समस्या पर रोक लगाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को अहम अधिकार दिए हैं।
UPSC को दिया ये आदेश
कोर्ट ने आदेश दिया कि यूपीएससी समय पर डीजीपी चयन के लिए राज्यों को पत्र लिखकर नामों का प्रस्ताव मांग सकता है। यदि कोई राज्य सरकार प्रस्ताव भेजने में टालमटोल करती है, तो यूपीएससी सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी करने वाले राज्यों की जवाबदेही तय की जाएगी और सख्त कार्रवाई भी की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
यह मामला तेलंगाना सरकार द्वारा डीजीपी की नियमित नियुक्ति में की गई देरी से जुड़ा है। राज्य के अंतिम स्थायी डीजीपी अनुराग शर्मा वर्ष 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वर्षों तक राज्य सरकार ने यूपीएससी को स्थायी नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश नहीं भेजी। आखिरकार अप्रैल 2025 में प्रस्ताव भेजे गए, जिस पर UPSC ने आपत्ति जताई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस देरी के चलते 2017 के बाद डीजीपी बनने के हकदार कई काबिल अधिकारी बिना इस पद पर पहुंचे ही सेवानिवृत्त हो गए।
प्रकाश सिंह गाइडलाइंस की अनदेखी पर फटकार
SC ने पिछली सुनवाई के दौरान एक बार फिर प्रकाश सिंह मामले में तय दिशा-निर्देशों को दोहराया। अदालत ने कहा कि डीजीपी की नियुक्ति पारदर्शी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, जिसमें यूपीएससी द्वारा शॉर्टलिस्ट किए गए तीन सबसे वरिष्ठ और योग्य अधिकारियों के पैनल में से ही राज्य सरकार को चयन करना होता है।
कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कई राज्य अपनी पसंद के अधिकारी को बनाए रखने के लिए ‘एक्टिंग डीजीपी’ का रास्ता अपनाते हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की मूल भावना के खिलाफ है। हालांकि यूपीएससी ने तेलंगाना सरकार की देरी पर आपत्ति जताई थी, लेकिन अदालत ने कहा कि प्रक्रिया को और टालना गलती करने वाले राज्यों को ही फायदा पहुंचाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर तेलंगाना में डीजीपी चयन प्रक्रिया पूरी करे।


















