Grievance Redressal Mechanism: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों में जल्द बनेगा शिकायत समाधान तंत्र

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Grievance Redressal Mechanism

रांची। राज्य सरकार ने सरकारी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था का ड्राफ्ट सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को भेज दिया है। अब विश्वविद्यालय अपने-अपने सिंडिकेट से इसकी मंजूरी लेकर प्रस्ताव विभाग को भेजेंगे, जिसके बाद इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

छात्रों को मिलेगा शिकायत दर्ज कराने का मंच

नई व्यवस्था के तहत छात्र शैक्षणिक सुविधाओं की कमी, प्रोस्पेक्टस में वादा की गई सुविधाएं न मिलने, भेदभाव या उत्पीड़न, नामांकन में अनियमितता, छात्र संघ चुनाव से जुड़े मुद्दों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न मिलने जैसी समस्याओं की शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इससे छात्रों को संस्थान के भीतर ही समाधान पाने का अवसर मिलेगा।

कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर समितियां

कॉलेज स्तर पर बनने वाली शिकायत निवारण समिति के अध्यक्ष प्राचार्य या प्रोफेसर-इन-चार्ज होंगे। इसमें विभागाध्यक्ष या वरिष्ठ शिक्षक, दो शिक्षक सदस्य, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी सदस्य सचिव और एक छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे।
वहीं, विश्वविद्यालय स्तर की समिति की अध्यक्षता डायरेक्टर ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स (DSW) करेंगे। इसमें प्रॉक्टर, कुलपति द्वारा नामित पांच प्रोफेसर, अंतिम वर्ष के दो छात्र सदस्य और रजिस्ट्रार सदस्य सचिव होंगे। समिति में एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व अनिवार्य रहेगा।

शिक्षक और कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था

शिक्षकों और कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में अलग समिति बनाई जाएगी, जिसमें प्रशासनिक और शैक्षणिक प्रतिनिधि शामिल होंगे।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस व्यवस्था को पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से लागू किया गया, तो यह शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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