HEC ignored in Union Budget:
रांची। केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट 2026 में देश के प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) को एक बार फिर पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने से कर्मचारियों में भारी असंतोष फैल गया है। बजट में एचईसी के लिए किसी भी तरह की वित्तीय सहायता या पुनरुद्धार योजना का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे संस्थान के भविष्य को लेकर चिंताएं और गहरी हो गई हैं।
बजटीय सहायता और बैंक गारंटी बंद होने से संकट गहराया
एचईसी मजदूर संघ (बीएमएस) के महामंत्री रमाशंकर प्रसाद ने कहा कि पहले केंद्र सरकार की ओर से एचईसी को नियमित बजटीय सहायता दी जाती थी, जिससे किसी तरह उत्पादन और संचालन जारी रहता था। लेकिन बीते कुछ वर्षों से यह सहयोग पूरी तरह बंद कर दिया गया है। हालात तब और बिगड़ गए जब सरकारी बैंक गारंटी भी समाप्त कर दी गई, जिससे एचईसी को बड़े प्रोजेक्ट और वर्क ऑर्डर मिलना लगभग असंभव हो गया है।
29 महीने का वेतन बकाया, कर्मचारी संकट में
बैंक गारंटी के अभाव और उद्योग जगत में बनी नकारात्मक छवि के कारण सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियां एचईसी से दूरी बना रही हैं। इसका सीधा असर उत्पादन, राजस्व और रोजगार पर पड़ा है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कर्मचारियों का 29 महीने का वेतन बकाया है। इससे मजदूर परिवार आर्थिक, मानसिक और सामाजिक संकट से जूझ रहे हैं।
बजट से थी बड़ी उम्मीद, लेकिन मिली निराशा
कर्मचारियों को इस बजट से विशेष उम्मीदें थीं। उन्हें आशा थी कि सरकार एचईसी के पुनरुद्धार के लिए कोई ठोस रोडमैप पेश करेगी या कम से कम बकाया वेतन भुगतान और बैंक गारंटी बहाली की घोषणा करेगी। लेकिन बजट भाषण में एचईसी का नाम तक न आना कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
बजट के बाद एचईसी परिसर में आक्रोश का माहौल है। मजदूर संघ ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह ऐतिहासिक औद्योगिक इकाई धीरे-धीरे बंदी के कगार पर पहुंच सकती है। संघ ने सरकार से तत्काल बजटीय सहायता, बैंक गारंटी बहाली और बकाया वेतन भुगतान की मांग की है, ताकि एचईसी को दोबारा पटरी पर लाया जा सके।












