Ranchi Child kidnapping:
रांची। रांची से दो मासूम बच्चें अंश और अंशिका की किडनैपिंग का मामला बीते कुछ दिनों से पूरे झारखंड में चर्चा का विषय बना रहा। 2 जनवरी को लापता हुए इन दोनों बच्चों को पुलिस ने करीब 12 दिनों की कड़ी मशक्कत और लगातार छापेमारी के बाद 14 जनवरी को रामगढ़ जिले से सकुशल बरामद किया। बच्चों की सुरक्षित वापसी से जहां परिवार ने राहत की सांस ली, वहीं इस मामले की जांच ने एक ऐसे खौफनाक सच से पर्दा उठा दिया, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया। अंश–अंशिका के अपहरण के मामले में रांची एसआईटी ने दंपती नभ खरवार और उसकी पत्नी सोनी कुमारी को गिरफ्तार किया।
शुरुआत में मामला केवल दो बच्चों के अपहरण तक सीमित लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने पूछताछ तेज की, यह साफ होता गया कि यह कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित और प्रोफेशनल बच्चा चोरी व मानव तस्करी गिरोह का हिस्सा है। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि अंश और अंशिका का सौदा पश्चिम बंगाल के एक बड़े सिंडिकेट के जरिए तय किया गया था। दोनों बच्चों को 5-5 लाख रुपये में मिर्जापुर गैंग को बेचने की तैयारी चल रही थी। पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह बहुस्तरीय तरीके से काम करता है। निचले स्तर के अपराधी, जिन्हें ‘गुलगुलिया गिरोह’ कहा जाता है, बच्चों का अपहरण करते हैं।
ये लोग झुग्गी-झोपड़ियों, कूड़ा बीनने वाले,बलून बचने वाले, पंचर साटने वाले, मूंफली बेचने वालों के परिवारों और बेहद गरीब तबके के बच्चों को निशाना बनाते हैं। किडनैपिंग के बाद बच्चों को ऊपरी स्तर के सिंडिकेट तक पहुंचते , जो मोटी रकम देकर उन्हें खरीदते हैं। ऊपरी स्तर के लोग बच्चों को सुरक्षित ठिकानों पर ले जाकर या तो आगे बेच देते हैं या फिर उन्हें भीख मंगवाने, पॉकेटमारी, चोरी, अंग बेचना, देह व्यापार और मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में इस्तेमाल करते हैं।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, नए-नए खुलासे होते गए।
रविवार को झारखंड पुलिस ने इस बड़े गिरोह से जुड़े 13 और आरोपियों को गिरफ्तार किया और 12 बच्चों को अलग-अलग इलाकों से बरामद किया। अब तक इस पूरे नेटवर्क में कुल 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें 9 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल हैं। इनमें से कई आरोपी पहले से ही अन्य आपराधिक मामलों में चार्जशीटेड हैं।
पुलिस ने जांच के दौरान कोठार (रामगढ़), बारियातू (लातेहार) और सिल्ली (रांची) समेत कई इलाकों से किशोरों और किशोरियों को संरक्षण में लिया। जब इन बच्चों की पहचान कराई गई और विभिन्न थानों में दर्ज गुमशुदगी की एफआईआर से मिलान किया गया, तो हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई। सिल्ली से 5 बच्चे, कोठार से 3 बच्चे और बारियातू से 4 बच्चे कुल 12 बच्चों के अपहरण और बरामदगी की पुष्टि हुई। इनमें से कुछ बच्चों को 2–3 साल पहले रांची, धनबाद, लोहरदगा और संभलपुर रेलवे स्टेशन से अगवा किया गया था।
अब एक सवाल उठकर सामने आ रहा है कि आखिर यह गिरोह छोटो बच्चों का ही किडनेपिंग क्यों करते है ? क्योंकि ये बच्चे कुछ दिन बाद भूल जाते थे कि उनके माता-पिता कौन हैं?। यही नहीं, आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण बच्चों के अभिभावक पुलिस के पास जाने से कतराते है और पुलिस पर उन्हें खोजने का दबाव नहीं बना पाते थे। इसी का फायदा यह गिरोह उठाता था। बच्चो को किडनैप करने के बाद ऊपरी स्तर के गैंग को बेचना और मोटा पैसा कामना। जबकि ऊपरी स्तर वाले भी बच्चों को सुरक्षित ठिकानों पर ले जाकर बेचते हैं या बच्चों को भीख मंगवाने, पॉकेटमारी-चोरी करवाते, देह व्यापार और मानव तस्करी जैसे कामों के लिए इस्तेमाल करते है नहीं तो अन्य अपराधों में इस्तेमाल करते हैं।
इतना ही नहीं, यह गिरोह बच्चों की रंगत, शक्ल-सूरत और उम्र के हिसाब से उनकी “कीमत” तय करता था।इस गिरोह में महिलाएं भी है, जो चोरी के बच्चों को अपने साथ रखती थीं, ताकि कोई शक न करे। गिरोह के तार झारखंड के अलावा बंगाल (कोटशिला, पुरुलिया), बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से जुड़े हैं। जांच में संकेत मिल रहे हैं कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हो सकता है, जहां बच्चे मानव तस्करी के बड़े रैकेट में शामिल होते हैं।
रांची के एसएसपी राकेश रंजन के अनुसार, यह गिरोह झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में भी सक्रिय है। गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया है कि कुछ बच्चों को बिहार के औरंगाबाद जिले और बंगाल के कोटशिला, पुरुलिया जैसे इलाकों में बेचा गया। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार अन्य राज्यों और संभवतः अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी रैकेट से भी जुड़े हो सकते हैं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। टीम झारखंड के कई जिलों और सीमावर्ती राज्यों में लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस का फोकस अब बाकी लापता बच्चों की तलाश, नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान और इस पूरे रैकेट की जड़ तक पहुंचने पर है। वहीं,रांची के ओरमांझी थाना क्षेत्र स्थित शंकर घाट, सिलदिरी निवासी 12 वर्षीय कन्हैया कुमार बीते 60 दिनों से लापता है। कन्हैया मामले में रांची पुलिस की एसआईटी ने सिल्ली के टुटकी गांव से दो गुलगुलिया को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ हो रही है।
उधर, अंश और अंशिका के मामले में गिरफ्तार नभ खेरवार और उसकी पत्नी सोनी कुमारी से भी एसआईटी लगातार पूछताछ कर रही है।जानकारी के अनुसार झारखंड सहित सात राज्यों में पुलिस की एसआईटी की कार्रवाई में पूर्व में विभिन्न स्थानों से गायब तीन-चार बच्चों के मिलने की सूचना सामने आयी है। सूचनाओं के वेरिफिकेशन में एसआईटी जुटी हुई है। जानकारी मिली है कि कन्हैया की गायब करने में भी यूपी के मिर्जापुर गैंग का हाथ है। पूछताछ के दौरान शरीर में दर्द की शिकायत पर नभ खेरवार को पुलिस इलाज के लिए धुर्वा के अस्पताल ले गयी।
अंश–अंशिका की सकुशल बरामदगी भले ही राहत की खबर हो, लेकिन इस मामले ने यह साफ कर दिया है कि बच्चा चोरी और मानव तस्करी का नेटवर्क कितना संगठित और खतरनाक है। यह घटना समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि गरीब और कमजोर तबके के बच्चों की सुरक्षा को लेकर और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
